chief minister trivendra singh rawat

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि सरकार महिलाओं की पीढा को समझते हुए उन्हें सशक्त बनाने हेतु मुख्यमंत्री घस्यारी योजना संचालित करने जा रही है। इसके तहत सस्ता गल्ला के तर्ज पर प्रदेेश में 7771 केंद्रों के माध्यम से गांवों तक पशुओं को सस्ता चारा उपलब्ध कराया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसे राज्य के लिए गौरव की बात बताते हुए झांकी को संस्कृति विभाग के म्यूजियम में संरक्षित किए जाने के निर्देश दिए थे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज से दो दिन के उत्तराखंड दौरे पर होंगे। सीएम योगी की जेड प्लस श्रेणी सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस प्रशासन और ख़ुफ़िया विभाग अलर्ट है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर टिहरी में बहुप्रतीक्षित डोबरा-चांठी पुल का लोकार्पण कर टिहरीवासियों को बड़ी सौगात दी है। पुल का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह ने कहा कि 2 करोड़ 95 लाख 92 हजार लागत के 725 मी लम्बे इस भारी वाहन झूला पुल की क्षेत्रवासी पिछले 14 वर्षों से इंतजार में थे पुल पर आवाजाही शुरू होने से अब आवागमन सुविधाजनक होने के साथ ही समय की बचत होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बागेश्वर में अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं/कार्यों की समीक्षा बैठक की। साथ ही उन्होंने विकास कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिये।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दिन अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अर्द्ध सैनिक बल व पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

कोविड से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करना उद्देश्य होना चाहिए। जिन लोगों के मास्क के उपयोग न करने पर चालान किये जा रहे हैं, उन्हें मास्क जरूर उपलब्ध कराये जाय।

इन योजनाओं में 'हंस जल धारा' के तहत लगभग 200 गांव में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना प्रमुख है जिसकी लागत लगभग 50 करोड़ रूपये है। इस योजना को उत्तराखंड में दो से तीन साल में पूरा किया जाना है।

सीएम त्रिवेन्द्र ने कहा कि जनप्रतिनिधयों, अधिकारियों एवं कार्मिकों को कोराना से बचाव के लिए जन जागरूकता पर विशेष ध्यान देना होगा। त्योहारों एवं शीतकाल का समय शुरू होने वाला है।

कुम्भ मेले के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बरकरार रखते हुए कोविड के दृष्टिगत सुरक्षित आयोजन किया जाना है। इस संबंध में अखाड़ों के संत महात्माओं का मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाएगा।