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यूं तो गुरूजी काम करते हैं लेकिन बिना पगार और मानदेय के जब कोई करता है तो बात अनूठी बन जाती है। फक्कड़ी स्वभाव के धनी आदित्य की जिंदगी साइकिल पर कट रही है।

72 साल के बाद भी आजादी के राजस्थान के आदिवासियों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। खबरें आती रही हैं कि यहां कुछ परिवार बच्चों को बेच देते हैं या गिरवी रख देते हैं। लेकिन हालात इससे भी कहीं अधिक बदतर हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यानी 24 जनवरी को दिल्ली में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2020 के 49 बाल विजेताओं के साथ बातचीत की।

माता-पिता का सहयोग बच्चे के पूरे प्रदर्शन में बहुत महत्तवपूर्ण भूमिका निभाता है। अच्छे परिणामों के लिए माता-पिता को इन सभी जानकारियों का अवश्य ही पालन करना चाहिए।ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी है

गुजरात के राजकोट और अहमदाबाद के सरकारी अस्पतालों में पिछले 200 बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत की वजह कुपोषण, जन्म से ही बीमारी, वक्त से पहले जन्म, मां का खुद कुपोषित होना बताया जा रहा है।

सामाजिक चिंता (Social anxiety) एक तरह की महामारी है। ये सोशल फोबिया के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में ये एक तरह का न उभरने वाले डर का गैर-मौजूदा फोबिया (non-existing phobia) है।

ऐसे में इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। उचित देखभाल के अभाव में यह छोटे बच्चे अक्सर बीमारियों के शिकार हो जाते है। इसी तरह की एक बीमारी है छोटे बच्चे के शिश्न की खाल चिपकने की समस्या, जो कई बार गंभीर संक्रमण का कारण भी बन जाती है। किंग जॉर्ज चिकित्सा

उसके किस विटामिन की कमी है क्या बीमारी है। यह ऐसा एप है जो 38 बीमारियों का पता कर लेता है। प्रदेश में पोषण माह के पहले पखवाड़े (1 से 15 सितंबर) में आरबीएसके एप के जरिये 8405 बच्चे संदर्भित किए गए हैं। इसमें अधिकांश बच्चों में विटामिन ए की कमी पाई गई है। जबकि कुछ बच्चों में

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा से जुड़े तीन शिक्षकों को ‘सरस्वती पुरस्कार 2019’, छः शिक्षकों को ‘शिक्षकश्री पुरस्कार’, माध्यमिक शिक्षा से जुड़े छः अध्यापकों को ‘राज्य अध्यापक’ तथा 15 अध्यापकों को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ देकर सम्मानित किया गया।