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मडफा दुर्ग में प्राकृतिक जलाशय के समीप दो प्राचीन जैन मंदिर है जो चंदेलकालीन प्रतीत होते है! इन मंदिरों में स्थापित जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं इनके पास स्तिथ एक वृक्ष के नीचे रखी हुई है! इसी के पास एक तालाब भी है जिसकी मान्यता है कि इसमें स्नान करने से चर्मरोग नष्ट हो जाते हैं।

लखनऊ: बुंदेलखंड के सात जिलों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा यूपी के अन्य हिस्सों में आवागमन की सुविधा के लिए बन रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास 29 फरवरी को होगा। करीब 7700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की संभावना है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की …

बुंदेलखंड के सात जिलों की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा यूपी अन्य हिस्सों में आवागमन की सुविधा के लिए बन रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास आगामी...

धर्मनगरी चित्रकूट में कई ऐसे स्थान हैं जहां विकास हो जाये तो समूचे जनपद का चहुमुखी विकास संभव है। ऐसा ही एक स्थान है तुलसीतीर्थ राजापुर जहां का विकास दशकों से अटका पड़ा है।

जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय का आंठवा दीक्षांत समारोह धूमधाम से मनाया गया।  बतौर मुख्य अतिथि सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में शिरकत की।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में आज 30 दिसम्बर को देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाग लेंगे।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में 30 दिसम्बर को देश के गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाग लेंगे। इन दोनों बड़े नेताओं के आने का मिनट टू मिनट कार्यक्रम जारी हो गया है।

धर्मनगरी चित्रकूट के समुचित विकास हेतु मोदी सरकार से लेकर सूबे की योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है । इसे पर्यटन की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु हर क्षेत्र में प्रयास किये जा रहे हैं।

ऐसी ही कुछ धरोहरें उस वक्त सामने आईं जब नगर पंचायत चित्रकूट(एमपी) ने अपने पुराने मालखाने का ताला खोला। अधिशाषी अधिकारी रमाकांत शुक्ला ने बताया कि हनुमानधारा के नजदीक बनी एक पुरानी बावली में पिछले 10-15 वर्ष पहले सफाई का कार्य हुआ था

पिछले एक दशक के अंदर बुन्देलखण्ड में बनाये गए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हर स्कूल ,कालेज के भवनों में जमकर लूट की गई। विभागीय लापरवाही का आलम तो ये रहा की आधे अधूरे भवनों की दशा सुधारने के बजाए कागजो में खानापूर्ति करने के उद्देश्य से कक्षाएं भी संचालित कर दी गईं।