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बुंदेलखंड में न तो पानी है और न ही जवानी है। जो बचे हैं वो कर्ज से बेहाल किसान हैं। पैकेज के नाम पर काफी कुछ दिया गया लेकिन उसे जहां पहुँचाना था वहां नहीं पहुंच सका। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। किसानों को गरीबी से उबारने के लिए सीमैप के वैज्ञानिकों ने कमर कस ली है।

राजधानी स्थित इंडियन इंस्‍टीटयूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) में मंगलवार को ओपेन डे से‍लिब्रेशन का अायोजन किया जाएगा। इस दिन आईआईटीआर को आम नागरिकाें और स्‍कूल छात्रों के लिए खोल दिया जाएगा। कोई भी व्‍यक्ति यहां आकर आईआईटीआर के पिछले 50 सालों के शोध कार्यों और अनोखे रिसर्च को देख और समझ सकेगा।