corona test

कोरोना टेस्ट के लिए सरकारी अस्पतालों की बाध्यता खत्म होने जा रही है। अब जल्द ही निजी चिकित्सक भी कोरोना की जांच की सलाह दे सकेंगे...

पूरे गांव को 2 बड़ी मशीनों से सैनिटाइज किया गया। वहीं कांटेक्ट ट्रेसिंग सर्विलांस की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा शुरू कर दी गई।

निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण की एकल चरण की जांच के लिए अधिकतम धनराशि 2500 रुपए (दो हजार पांच सौ मात्र) निर्धारित की गई है।

देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ने के साथ ही टेस्टिंग की रफ्तार में भी तेजी आ गई है। इंडियन मेडिकल काउंसिल फॉर रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों के मुताबिक देश में टेस्टिंग का आंकड़ा 50 लाख को पार कर गया है।

कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हाथ लगी है। दरअसल, देश में तीन तरह के टेस्ट विकसित किए जा चुके हैं और चौथे टेस्ट की भी पूरी तैयारी है।

प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि   कि आरोग्य सेतु अलर्ट जनरेट होने पर लोगों को कन्ट्रोल रूम से काल किया जा रहा है। अब तक कुल 23,780 लोगों को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली गयी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण को बढने से रोकने के लिए टेस्टिंग बहुत जरूरी है, ताकि मरीज मिलते ही तुंरत इलाज शुरू किया जा सकें। टेस्ट की सुविधा काफी ना होने के चलते विभाग टेस्ट कम करने से बच रहा है।

स्वास्थ विभाग द्वारा जिस प्रकार से लोगो की जांच किए जाने का दावा किया जा रहा है उससे तो यही लगता है कि पूरी कमान अप्रशिक्षित लोगों के हाथ में सौंप दी गई है और चिकित्सक दूर खड़े होकर आराम फरमा रहे हैं ।

नगर निगम के कर्मचारियों से कोरोना परीक्षण के लिए स्वैब नमूना एकत्र करते सीएमओ कार्यालय की मेडिकल टीम ।

डॉ पुष्कर दहीवाल ने बताया कि रूई के फाहे से किसी मरीज के गले या नाक से नमूना लेने में 30 से 40 सेकेंड से ज्यादा का वक्त नहीं लगता।