Corona vaccine

एक बार फिर से कोविड-19 वैक्सीन Sputnik V सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, वैक्सीन की डोज लेने वाले हर सात में से एक वॉलंटियर में साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं।

सौम्या स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि नॉर्मल लाइफ में लौटने के लिए साल 2022 से पहले पर्याप्त मात्रा में कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) का मिल पाना मुश्किल है।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. वीजी सोमानी ने मंगलवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को ऑक्सफोर्ड की कोविड-19 वैक्सीन पर फिर से क्लीनिकल परीक्षण शुरू करने की अनुमति दे दी है।

कोरोना वैक्सीन पर डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि वैक्सीन कब तक लॉन्च होगी, इसकी कोई तारीख तय नहीं है। मैं अपने मंत्रालय और देश के प्रधानमंत्री की ओर से आपको ये आश्वस्त करना चाहता हूं कि क्लीनिकल ट्रायल में कोई भी कटौती नहीं की जाएगी।

वैक्सीनों को समानांतर कतारों में खड़े दर्जनों दो मीटर ऊंचे फ्रीजर में लगातार -80 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाएगा। यहीं से होकर टीके आगे लोगों तक का सफर तय करेंगे।

दुनिया भर में अब तक कोरोना संक्रमण के 2 करोड़ 80 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं और क़रीब नौ लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को इतंजार है तो सिर्फ कोरोना वैक्सीन का। महामारी के जल्द-जल्द से खत्म होने की उम्मीद में वैक्सीन को लेकर उत्सुकता मची हुई है।

कोरोना वायरस की रूसी वैक्सीन सुरक्षित पायी गयी है और ये भी पता चला है कि इस वैक्सीन से शरीर में शक्तिशाली इम्यून रेस्पांस उत्पन्न होता है।

कोरोना वायरस की इम्यूनिटी के लिए ये एंटीबॉडीज जरूरी हैं। इस वैक्सीन के ट्रायल फाइनल स्टेज पर पहुंच चुके हैं। जितनी डोज आखिरी चरण के ट्रायल में है, उतनी ही इस टेस्ट के दौरान दिए जाने पर पाया गया है कि एंटीबॉडीज की मात्रा उन लोगों से ज्यादा थी जो वायरस से ठीक हो रहे हैं।

कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर दुनियाभर में अब तेजी से उम्मीदें उठने लगी हैं। ऐसे में ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वायरस वैक्सीन को दुनियाभर में जितनी भी जगह वैक्सीन बन रही हैं, उनमें सबसे ज्यादा महत्ता दी जा रही है।