Corona vaccine

दुनिया भर में कोरोना से निजात पाने के लिए वैक्सीन तैयार करने वालों का लक्ष्य दिसंबर तक हर हाल में वैक्सीन बना लेने का है। लेकिन ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि वैक्सीन पूरी दुनिया को समय रहते मिल पायेगी या नहीं

जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉक्टर रेणु स्वरूप ने जानकारी देते हुए बताया कि पीएम केयर्स फंड से 100 करोड़ रुपये कल ही जारी किए गए हैं।

डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि विश्व में लगभग 100 ऐसी संस्थाएं हैं जो वैक्सीन पर काम कर रही हैं। इनमे सात से आठ संस्थाएं काफी आगे है। बता दें कि वैक्सीन बनाने के लिए दुनिया के 40 देश शोध और इलाज की तकनीक तलाशने में जुटे हुए हैं।

साल 1998 में भारत बायोटेक ने दुनिया की पहली सीजियम क्‍लोराइड फ्री हेपेटाइटिस B की वैक्‍सीन बनाई। इसे डॉ एपीजे अब्‍दुल कलाम ने लॉन्‍च किया था। अगले साल तक कंपनी ने वह वैक्‍सीन बनाने की क्षमता 100 मिलियन कर ली। भारत बायोटेक ने 2006 में कंपनी ने रेबीज की वैक्‍सीन बनाई।

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। कोरोना पर कैसे काबू पाया जाए इस पर मंथन चल रहा है। इस बीच ईरान पर आरोप लगे हैं कि उसने कोरोना वायरस की वैक्सीन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए ब्रिटिश संस्थानों पर साइबर हमले शुरू कर दिए हैं।

कोरोना वायरस के खिलाफ पीजीआई चंडीगढ़ में एमडब्ल्यू यानि माइक्रो बैक्टीरियम वैक्सीन पर शुरू हुए ट्रायल के पहले फेज सफल हो गया है। यह वैक्सीन के ट्रायल का पहला फेज (प्रथम चरण) था।

देश में कोरोना महामारी के बीच एक उम्मीद की किरण नजर आई है। दरअसल पुणे की दवा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया मई-जून में कोरोना के इलाज में...

लोगों के उम्मीद पर पानी फेरते हुए ब्रिटेन के एक मंत्री द्वारा बयान दिया गया है कि इस साल के अंत तक कोरोना की वैक्सीन पाना मुश्किल है।

जर्मनी की संस्था फेडरल इंस्टीट्यूट ने जानकारी देते हुए बताया कि जर्मनी सरकार द्वारा इस संस्था को मनुष्यों पर वैक्सीन का परिक्षण करने अनुमति दे दी गई है।