coronavirus in india

ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैंकॉक ने कहा है कि देश में नए किस्म के कोरोना वायरस के मिलने से हालत बेकाबू हो चुके हैं। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लंदन और दक्षिणपूर्वी इंग्लैंड के कई इलाकों में लॉकडाउन लगा दिया है।

देश में कोरोना वायरस 17 सितंबर को पीक पर पहुंच गया था इसके बाद से प्रतिदिन आने वाले केसों में गिरावट जारी है। अक्‍टूबर में रोज आने वाले केसों की संख्‍या 50 हजार से नीचे आ गई और अब यह और कम हो रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से एक एडवायजरी जारी की गई है। इसमें जिला और राज्य स्तर पर कोरोना फ्रंट पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों की लिस्ट तैयार करने का कहा गया है। मंत्रालय ने नोडल अधिकारियों को बताया है कि ये लिस्ट कैसे तैयार करना है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में फिलहाल कुल एक्टिव मामले 10.23 प्रतिशत है, तो वहीं ठीक होने या डिस्चार्ज केस की संख्या 88.26 प्रतिशत है। इसके साथ ही इस संक्रामक रोग से 1.52 प्रतिशत लोगों की मौत हो चुकी है।

भारत में हर रोज कोरोना से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी होने से पुराने रिकॉर्ड टूट रहे हैं और नया रिकॉर्ड बनता जा रहा है। 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के मामलों में रिकॉर्ड उछाल आया है।

लॉकडाउन 4 की समय समय सीमा ख़त्म होने वाली है। वहीं लॉकडाउन बढ़ेगा या नहीं इसपर आज फैसला हो सकता है। इस बाबत पीएम मोदी और अमित शाह के बीच बीते दिनों लंबी बैठक भी हुई थी। वहीं कई राज्यों ने लॉक डाउन को लेकर अपना पक्ष भी रखा था।

दरअसल हाल के दिनों में भारत में कोरोना से संक्रमित मरीजों का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार दिनों के दौरान रोजाना करीब 6000 से ज्यादा नए केस सामने आने के बाद शनिवार को रिकॉर्ड मामले दर्ज किए गए।

लॉकडाउन के बीच भले ही श्रमिक ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया हो लेकिन बड़ी तादात में सड़क मार्ग के जरिये घर वापसी कर रहे मजदूरों के साथ हादसों का सिलसिला जारी है।

कहा जा रहा है कि लाकडाउन फोर एक बार फिर बढ सकता है क्योंकि अधिकतर राज्य कुछ छूट के साथ इसके बढाए जाने के पक्ष में दिख रहे हैं। गत 12 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि राज्य सरकारें अपने सुझाव केन्द्र को भेजे कि वह लाकडाउन फोर में बढाना चाहते है कि नहीं और इसमें क्या बदलाव चाहते हैं।

यह लोग किसी तरह से पुरानी अथवा नई साइकिल खरीदकर बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार घर लौटने के लिए सैकड़ों किलोमीटर की लंबी साइकिल यात्रा पर निकल पड़े हैं।