Delhi violence

सीएए व एनसीआर के खिलाफ हुए प्रदर्शन और दिल्ली दंगों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली में हुई हिंसा में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ सामने आया है।

बीते महीने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रचने और दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को 22 अक्टूबर तक जेल में ही रहना होगा।

आपको बता दें कि इसी साल फरवरी में दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में उमर ख़ालिद पर दिल्ली पुलिस ने 6 मार्च 2020 को एक एफआईआर दर्ज की थी।

बीते महीने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को " दोषी" घोषित किया है।

राघव चड्ढा ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘समिति ने सोमवार को फेसबुक के खिलाफ की गई शिकायतों के मसले पर बैठक बुलाई थी। बैठक में समिति के सामने तीन गवाह पेश हुए।

आम आदमी पार्टी (आप) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने उत्तर-पूर्व दिल्ली में दंगों में शामिल होने की बात कबूल कर ली है। दिल्ली पुलिस की जांच पूछताछ में हुसैन ने स्वीकार कर ली है

दिल्ली पुलिस आज हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में करीब 1100 पेज का आरोप पत्र दाखिल कर रही है। जिसमें हिंसा की प्लानिंग की तरफ इशारा किया गया है।

दिल्ली हिंसा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। 25 फरवरी को दिल्ली के भजनपुरा इलाके में अकबरी बेगम की घर में लाश मिली थी। इस केस में अरुण कुमार, वरुण कुमार, विशाल सिंह, रवि कुमार, प्रकाश चंद और सूरज को गिरफ्तार किया गया था।

सीएए के खिलाफ फरवरी में हुए विरोध के दौरान उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगे भड़के। जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदू समुदाय को निशाना बनाते हुए कई दुकानों और घरों आदि में आगजनी की।