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भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की मारक क्षमता को मजबूत करने में जुटी है। इसके लिए भारतीय सेना ने 38 विस्तारित रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा है, जो करीब 450 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हो।

डीआरडीओ की तैयार की प्रोटेक्टिव कार्बाइन का हाल ही में किया गया आखिरी परीक्षण भी सफल रहा। प्रोटेक्टिव कार्बाइन के परीक्षण में हथियार ने ट्रायल्स के आखिरी दौर में प्रवेश कर लिया है।

मौजूद समय मे इंडियन आर्मी के तोपखानों के लिए 400 से ज्यादा आर्टिलरी गन की जरूरत हैं। भारत वैसे तो इजराइल से होवित्जर मंगवाने की तैयारी में है लेकिन उसके मुकाबले देश के पास देश मे गन बनाना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

जानकारी के मुताबिक, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल डीआरडीओ द्वारा बनाया गया है, जिसे भारतीय सेना द्वारा परीक्षण किया गया है। पहले इस मिलाइल की रेंज करीब 300 किमी था, जिसे बढ़ा कर 400 से अधिक कर दिया गया है। डीआरडीओ ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के अलावा कई मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है

दुश्मनों को छक्के छुड़ाने के लिए भारत ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मंगलवार को यानी आज क्विक रिएक्शन सर्फेस टू एयर मिसाइल्स (Quick Reaction Surface-to-Air Missile (QRSAM) का एक बार फिर सफल परीक्षण किया गया है।

भारत की तरफ से दुश्मनों को धूल चटाने में शौर्य मिसाइल के नए संस्करण का सफल परीक्षण है। शौर्य मिसाइल परमाणु क्षमता रखने वाली मिसाइल है। सबमरीज लॉन्च्ड बैलेस्टिक मिसाइल होती है। इसे रक्षा रिसर्च और विकास संस्थान(DRDO) ने विकसित किया।

चीन को हर कीमत पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत एक नई एयर-लॉन्च मिसाइल विकसित कर रहा है। ये मिसाइल 10 किमी से अधिक की स्टैंड-ऑफ दूरी से दुश्मन के टैंक को मार गिराने की क्षमता रखती है।

गुरुवार की सुबह 6:45 बजे राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 'नाग' एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परिक्षण हु्आ। ये नाग के अंतिम चरण का ट्रायल रहा।

भारतीय वायु सेना का दमखम और बढ़ने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने के लिए एक नई मिसाइल को विकसित किया है।

चीन की गुस्ताखियां मई के महीने से ही शुरू हो गई थी, और अभी तक बरकरार हैं। ऐसे में चीन के साथ बीते कई महीनों से चल रहे तनाव के बाद भारत ने परमाणु कौशल को बढ़ाते हुए 3 अक्टूबर को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की उन्नत संस्करण शौर्य मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।