freedom

आजादी की लड़ाई साल 1857 में शुरु हुआ , यह संघर्ष केवल शहर तक सीमित न रहकर गांव-गांव फैला था। इसमें अमीर, गरीब, किसान, मजदूर, हिन्दू, मुस्लिम सब ने मिलकर भाग लिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अवध क्षेत्र का भी अहम योगदान रहा।

साल के बारह महीनों का अपन-अलग ही महत्व है और आपको हम बताने जा रहे है कि आप के व्यक्तित्व में आपके जन्म के महीने से कौन से गुण स्वतः ही आता हैं। इस कड़ी में सबसे पहले जनवरा में जन्मे लोगों का स्वभाव जानते हैं।

फिरोजपुर : क्या आप जानते हैं ब्रिटिश इंडियन रेलवे देश की आजादी में क्रांतिकारियों के लिए कितनी कारगर हथियार साबित हुई थी? 1853 में 21 तोपों की सलामी के साथ दोपहर 3:45 बजे पोरबंदर से ठाणे के लिए जब पहली बार 14 डिब्बों को लेकर भारतीय ट्रेन रवाना हुई थी तब अंग्रेजों ने शायद यह …

200 साल से अंग्रेजों की गुलामी झेलने के बाद 15 अगस्त को भारत आजाद हुआ था, यह दिन देश के लिए बहुत खास है। भारत को आजाद कराने के लिए इस दिन लाखों लोगों ने अपने प्राण गवाये थे।

रियाद। सऊदी अरब में महिलाओं को एक और आजादी मिल गई है। अब उन्हें विदेश जाने के लिए पुरुष अभिभावकों की अनुमति नहीं लेनी होगी। सउदी सरकार ने घोषणा की है कि देश की एडल्ट महिलाओं को पुरुष अभिभावक की अनुमति के बिना पासपोर्ट प्राप्त करने और यात्रा करने की इजाजत दी जाएगी। सऊदी अरब …

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि देशभर में अनगिनत स्थानों पर देशवासी स्वतंत्रता के लिये अपना योगदान दे रहे थे। लखनऊ भी स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रमुख केन्द्र रहा है।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम के स्टेट नोडल हेड तथा मातृ-शिशु कल्याण विभाग के निदेशक डा. सुरेश चन्द्रा ने बताया कि बच्चों में कृमि संक्रमण से जुड़े जन स्वास्थ्य समस्या से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सरकार द्वारा 25 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है।

नई दिल्ली : देश में लोकतंत्र के नाम पर कुछ भी करने की आजादी है। आम आदमी यदि आय का ब्योरा नहीं देता है तो उसकी गरदन तुरंत नाप ली जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि हमारी राजनीतिक पार्टियां अपने आय-व्यय का ब्योरा देने में कितनी ईमानदार हैं? क्या ये अपनी आय के स्रोतों …

ईरान में महिलाएं सिर ढंकने वाले हिजाब और नकाब के खिलाफ सडक़ों पर उतर आईं हैं। जगह – जगह महिलाएं सिर ढकने वाले हिजाब को उतरा कर उन्हें टहनियों या डंडों में बांध कर लहराती दिखाई दे रही हैं। राजधानी तेहरान और इस्फाहान शहर से शुरू हुआ ‘आजादी’ का यह मूक आंदोलन दिनों दिन फैलता …

आलोक अवस्थी, वर्षा सिंह देहरादून। आखिरकार पर्वतीय राज्य उत्तराखंड की आजादी के सत्रह बरस में यहां के तंत्र ने गण को अपने जैसा ढाल ही लिया। सबको अपने-अपने हिस्से का हक चाहिए। गांव को बिजली चाहिए वह भी बिना मीटर के, नेता को सोने का महल चाहिए अंगूठा लगा के.. तो अफसर को भी सब …