Galwan Valley

गलवान घाटी और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास और अन्य इलाकों से चीनी सेना के पीछे हटने के बाद अब वहां के हालात स्थिर और बेहतर हो रहे हैं।

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव के दौरान बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) भी पूरी सक्रियता से अपनी भूमिका निभा रहा है।

भारत और अमेरिका के इस दबाव से चीन बुरी तरह भड़का चिल्लाया और धमकी दी लेकिन जब उसकी सारी गीदड़ भभकियां खाली गईं तो उसने तीन कदम आगे बढ़कर एक कदम पीछे हटने का दांव खेला। लेकिन न तो भारत इस झांसे में आ रहा है न ही अमेरिका।

लद्दाख की गलवान घाटी मे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन और भारत की सेनाओं के पीछे हटने के बाद तनाव भले ही कम होता दिख रहा हो मगर भारत के अभी भी चीन को लेकर सख्त रुख जारी रखने के संकेत मिले हैं।

रविवार को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने वीडियो कॉल पर चीनी विदेश मंत्री और राज्य के काउंसलर वांग यी के साथ वार्ता की थी।

बीते कई हफ्तों से भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रहा विवाद अब कम होता दिखाई दे रहा है। ये राहत की खबर सोमवार को लाइन ऑफ एक्च्यूअल कंट्रोल से मिली  है।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि 15 जून को गलवान घाटी के पास हुई झड़प वाली जगह से चीनी सेना एक किलोमीटर तक पीछे हटी है।

लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़क के बाद चीन और भारत में तनाव चरम पर है। 15 जून की रात को दोनों देश के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए।

पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेना के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद चीन लगातार गलवान घाटी पर दावा ठोंक रहा है। अब भारत ने चीन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि उसकी हरकतों के नतीजे दोनों के बीच संबंधों पर दिखाई देंगे।

देश की रक्षा के लिए सरहद पर डटे खड़े जवान अपनी जान की परवाह किये बगैर शहीद हो जाते हैं। ऐसे में खबर आई है कि इंडियन आर्मी के एक जवान ने नदी में डूब रहे अपने दो साथियों को बचाते-बचाते अपनी जान कुर्बान कर दी।