gdp growth

देश की इकोनॉमी पर कोविड-19 का असर साफ दिख रहा है। इस संकट की घड़ी मे अर्थव्यवस्था घटकर नीचे आ गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2019-20 की जीडीपी ग्रोथ रेट के आंकड़े जारी किए हैं। पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रही.यह करीब 11 साल का निचला स्‍तर है। इससे पहले 2009 में जीडीपी ग्रोथ इस स्‍तर तक पहुंची थी।

कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए देशव्यापी लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे देखते हुए चालू वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी विकास दर महज 1.9% रहने का अनुमान जताया है।

दिन प्रतिदिन बढ़ती मंहगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। लोगों ने प्याज की बढ़ती कीमत से परेशान उसे खाना छोड़ दिया है तो अब खाने के तेल के दामों में भी वृद्धि हो रही है। इससे महंगाई भी जोर पकड़ती जा रही है। जो कीचेन का जायका बिगाड़ने के लिए काफी है।

SBI ने एक रिपोर्ट जारी करके वर्तमान वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। SBI  की रिपोर्ट में ऑटोमोबाइल बिक्री में गिरावट, एयर ट्रैफिक मूवमेंट में कमी, कोर सेक्‍टर ग्रोथ के घटने और कंस्‍ट्रक्‍शन व इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश घटने के कारण देश की जीडीपी ग्रोथ में कमी देखने को मिलेगी।

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार (29 जनवरी) को लोकसभा में आर्थिक सर्वे पेश किया। इसमें वित्त वर्ष 2018-2019 में जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक सर्वे में यह भी संकेत है, कि सरकार इस बजट में रोजगार सृजन, ग्रामीण, कृषि सेक्टर, शिक्षा पर ज्यादा ध्यान …

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को देश में लोग भले ही कुशल राजनीतिज्ञ नहीं मानते हों, लेकिन वो एक कुशल और मंझे हुए अर्थशास्त्री हैं।

नई दिल्ली: देश की सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी ग्रोथ इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में गिरकर 5.7 प्रतिशत पर आ गई है। बता दें, कि यह इसका तीन साल का निचला स्तर है। विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के बीच लगातार तीसरी तिमाही में नोटबंदी का असर दिखाई दिया। गौरतलब है कि इससे पिछली …