India China Standoff

जिनपिंग ने नए तरीके की सैन्य प्रशिक्षण प्रणाली स्थापित करने, नए दौर के लिए ज्यादा मजबूत सशस्त्र बलों के निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी का लक्ष्य सशस्त्र बलों को विश्वस्तरीय सेना के रूप में डवलप करने का है।

गौरतलब है कि अभी पिछले हफ्ते ही भारत ने ओडिशा से क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल का टेस्ट किया था। जो कि पूरी तरह से सफल रहा था। ये मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक काउंटर सिस्टम से लैस है।

भारत की तरफ से विक्रमादित्य और उसके लड़ाकू हेलीकॉप्टर, स्वदेशी विध्वंसक शिप कोलकाता और चेन्नई के अलावा, स्टील्थ फ्रिगेट शिप तलवार, फ्लीट सपोर्ट शिप दीपक और इंटीग्रल हेलीकॉप्टर भी अभ्यास में भाग लेंगे।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत को सबसे पहले अपनी सेना को वापस बुलाना चाहिए, क्योंकि भारत ने अपनी सेना को सबसे पहले अवैध तरीके से पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भेजा था।

आज आठवें दौर की ये बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इससे पहले की सात बैठकों में सीमा पर चल रहे तनाव को कम करने को लेकर कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका था। कुल मिलाकर पूर्व की सभी बैठकें बेनतीजा साबित हुई थी।

15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। दावा है कि चीन के भी 43 सैनिकों की मौत हुई थी। लेकिन चीन इस दावे को ख़ारिज करता आ रहा है।

भारत किसी भी कीमत पर अब चीन की बात मानने को तैयार नहीं है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहले ही ये बात कह चुके हैं कि चीन को अपनी सेना को पीछे लेना होगा। सीमा पर से भारत की सेना अभी पीछे नहीं जाने वाली है।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ़ कर दिया है कि देश विघटन और डी-एस्कलेशन वार्ता को जारी रखने के लिए तैयार है ताकि मई 2020 से तैनात दोनों सेनाएं अपने बैरक में लौट सकें।

लद्दाख से सटे सीमा पर भारत और चीन के बीच पिछले 6 महीने से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। शांति बहाली और सैनिकों को विवादित क्षेत्रों से हटाने को लेकर कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है लेकिन कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है।

बता दें कि माइक पॉम्पियो और अमरीकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर के भारत दौरे पर 28 अक्टूबर को चीन के विदेश मंत्रालय का एक बयान आया था। जिसमें चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि अमरीकी विदेश मंत्री फिर वही झूठ दोहरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंध के मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। चीन ने कहा था कि भारत के साथ सीमा विवाद द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई स्थान नहीं है। पॉम्पियो के दौरे और उनकी टिप्पणी को लेकर चीन की तरफ़ से दो कड़ी आपत्तियां आ चुकी हैं।एक भारत स्थित चीनी दूतावास की और दूसरी चीनी विदेश मंत्रालय की।