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विमान में गड़बड़ी सामने आते ही पायलट सुरक्षित विमान से बाहर निकलने में सपल रहे। वायुसेना का मिग 21 फाइटर प्लेन नियमित उड़ान पर था। हादसे के बाद जहां पर विमान का मलबा गिरा है उस इलाके की एयरफोर्स  की तरफ से जांच की जा रही है।

भारत और चीन के बीच बीते कई महीनों से सीमा पर तनाव चल रहा है। इसको देखते हुए सेना सीमा पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगी हुई है। उत्तराखंड से लगती चीन सीमा पर भी बीते कई महीनों से सेना की सतर्कता कई गुना बढ़ा दी गई है।

राफेल में लगने वाला हैमर मिसाइल यानी हाइली एजाइल एंड मैनोवरेबल म्यूनिशन एक्सेटेंडेड रेंज की क्षमता इतना है कि अगर कोई दुश्मन पहाड़ी के पीछे भी छिपकर बैठा हो, तो उसे भी ढूंढ कर मार गिराएगा। अगर इसके रेंज की बात करें, तो इसकी रेंज लगभग 20 से 70 किलोमीटर तक हो सकती है।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। इस लड़ाकू विमान का एक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की इस्तेमाल हो रहा था। हादसे के बाद लापता विमान के दूसरे पायलट की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

भारतीय वायु सेना ने बताया कि राफेल विमानों का दूसरा जत्था फ्रांस से नॉन-स्टॉप उड़ान भरकर बुधवार रात 8:14 बजे भारत पहुंचा। 3 राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस के इस्ट्रेस से गुजरात के जामनगर आए।

चिनूक हेलीकॉप्टर भारी मशीनों और तोपों को भी एक जगह से दूसरी जगह उठाकर ले जा सकता है। ये हेलीकॉप्टर 280 किमी प्रति घंटे की स्पीड से हवा में उड़ता है और इसकी ऊंचाई 18 फीट और चौड़ाई 16 फीट है। चिनूक हेलीकॉप्टर को दो पायलट उड़ा सकते हैं।

चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर भी सैन्य गतिविधि बढ़ गई है। सुरक्षा की तैयारियों के बीच वायु सेना उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अपना एडवांस लैंडिंग ग्राउंड मजबूत करने जा रही है। सेंट्रल एयर कमांड के एयर मार्शल राजेश कुमार ने कुछ दिन पहले ही इस संदर्भ में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की थी।

आज यानी 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) अपना 88वां स्थापना दिवस (Air Force Day 2020) मना रही है। इस मौके पर वायुसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। बता दें भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। तब से लेकर वायुसेना के जवान भारत की रक्षा में मुस्तैद …

भारत की सेना के पास देश की सुरक्षा के लिए ताकतवर और अत्याधुनिक मिसाइलों का जखीरा है। भारत के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो उसे चीन से बेहतर बनाती हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा भारत की बड़ी प्राथमिकता है और वह अपने क्षेत्र को संरक्षित रखने के लिए दृढ़ संकल्प है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फ्रांस के रक्षा मंत्री भी समारोह में शामिल हुए।