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देश की अर्थव्यवस्था  कोरोना वायरस की वजह से डगमगाने  लगी तो इसको बचाने के लिए सरकार ने मई के दूसरे सप्ताह में 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर  पैकेज की घोषणा की थी।  लेकिन इससे हालात में सुधार होंगे ये जरूरी  नहीं है।

विश्व की तीन बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में शामिल फिच रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष यानी के 2021-22 में 9.5 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

पूर्व गवर्नर जालान ने मोदी सरकार के कोरोना वायरस से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को सुदृढ बनाने के लिए उठाए गए क़दमों को काफी सकारात्मक करार दिया है।

दुनिया के चर्चित रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस का मानना है कि इस आर्थिक पैकेज से कोविड-19 का नकारात्मक असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

अब सरकार इस कोरोना के चलते चालू वित्त वर्ष के उधारी में इजाफा करना पड़ा। सरकार ने अब वित्त वर्ष 2021 के लिए 12 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का फैसला किया है।

मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि कोरोना संकट के कारण मौजूदा समय में चीन के जो हालात हैं, उसका फायदा निश्चित तौर पर भारत को मिलने जा रहा है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने केंद्र और राज्य सरकारों को देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने को लेकर सलाह दी है।

कोरोना वायरस के कारण अधिकांश देशों में लॉकडाउन जारी है, ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। भारत की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की जो रिपोर्ट भारत की अर्थ व्यवस्था को लेकर सामने आयी है, वो बेहद खराब है।

शून्य वृद्धि दर करीब 60 साल की सबसे खराब स्थिति होगी। बहरहाल, इसके साथ ही आईएमएफ ने जोड़ा कि अब भी एशिया क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर कर सकता है। इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है।

यह ठीक वैसा है जैसे किसी साइकिल का एक पहिया पंक्चर हो जाए तो आप उम्मीद नहीं कर सकते हैं ​वो कितनी आगे तक जाएगी। आसान शब्दों में कहें तो अगर यह संकट कुछ और समय के लिए रहता है तो अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। इसमें बैंकिंग सेक्टर भी शामिल होगा।