Ishq

पैतृक जिले आजमगढ़ में कैफी साहब के जन्म शताब्दी वर्ष पर जगह-जगह विविध आयोजन किया जा रहा है और हर तरफ उनके गीत गुनगुनाये जा रहे हैं। अपने पैतृक जिले में कैफी साहब को यूं ही नहीं याद किया जा रहा है। सच तो यह है कि कैफी साहब को अपनी माटी से गहरा लगाव था।

नहीं इश्क में इसका तो रंज हमें, किशिकेब-ओ-करार जरा न रहा गमे-इश्क तो अपना रफीक रहा, कोई और बला से रहा-न-रहा दिया अपनी खुदी को जो हमने मिटा, वह जो परदा-सा बीच में था न रहा रहे परदे में अब न वो परदानशीं, कोई दूसरा उसके सिवा न रहा न थी हाल की जब हमें …