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क्रायोजेनिक इंजन के विकास में बहुत बाधाएं तो आई, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने हर बाधा को पार करके नई सफलता हासिल की है। ऐसे में पहले जो क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) विदेशों से आता था। वो इंजन अब भारत(India) में ही निर्मित किया जाएगा।

बीएचयू आईआईटी के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। इसरो आईआईटी में अपना रिजनल एकेडमिक सेंटर खोलने जा रहा है।

रांची स्थित मेकॉन कंपनी ने सेमी क्रायोजनिक इंजन टेस्टिंग फैसिलिटी तैयार की है। जिसके तहत देसी इंजन टेस्टिंग फैसिलिटी से अंतरिक्ष में रॉकेट द्वारा सामान ले जाने की क्षमता में अब बढ़ोतरी होगी। बता दें, देश के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 'पीएसएलवी-सी49/ईओएस-01 मिशन की लॉन्चिंग के लिए आखिरी गिनती श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 1.02 बजे शुरू की गई थी। जो कि दोपहर में 3.02 बजे पूरी हुई थी।

ईओएस-01 अर्थ ऑब्जरवेशन रिसेट सैटेलाइट का ही एक एडवांस्ड सीरीज है। इसरो ने इसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) लगाया है। किसी भी समय और किसी भी मौसम में पृथ्वी पर नजर रख सकेगा। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 7 नवंबर को अपना पहला सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है। 'EOS-01' को PSLV-C49 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इसरो नये साल में चंद्रयान-3 लॉन्च करने जा रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी इसरो (इसरो) के वैज्ञानिक रहे नंबी नारायणन एक झूठे केस में 2 महीने तक जेल की सजा काट चुके हैं। उन्होंने जेल से रिहा होने के बाद बहुत बड़ा खुलासा किया है।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) अगले साल चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की लॉन्चिंग करने जा रहा है। इस मिशन पर लैंडर और रोवर जाएंगे।