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फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है और इसमें महिलाएं खूब साज-श्रृंगार करती है।सोलह श्रृंगार तो महिलाओं का जन्मसिद्ध अधिकार है। मेहंदी लगाकर बोर हो गई हैं, तो इस बार अपने हाथों पर कुछ नया ट्राई करें।इस फेस्टिव सीजन भरवा मेहंदी न लगाकर ये डिजाइनर मेहंदी ट्राई करें। शादीशुदा महिलाएं हों या फिर कुंआरी लड़कियां, मेहंदी लगाना सबको अच्छा लगता है। 

झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा जल्द होने की संभावना है। माना जा रहा है कि अक्टूबर के अंतिम या नवंबर के प्रथम सप्ताह में चुनाव की घोषणा हो सकती है। इस बीच सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

बारिश का प्रकोप तो देश से कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। बारिश जाते-जाते भी कई राज्यों में उत्पाद मचाए हुए है। इस समय बारिश और बाढ़ की समस्या से लगभग देश के तीन राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड बुरी तरह से त्रस्त हैं।

एटीएस ने ओसामा बिन लादेन के वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा के एक खूंखार आतंकी मौलाना कलीमुद्दीन को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। इस मोस्टक वांटेड आतंकी के बारे में कहा जा रहा है कि यह स्लीेपर सेल की सहायता से देश को दहलाने वाले किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में था।

झारखंड के सरायकेला में तबरेज अंसारी के मॉब लिंचिंग केस में पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में फिर से एक नई चार्जशीट दाख़िल की है। इसमें आरोपियों के खिलाफ फिर से हत्या की धारा 302 जोड़ दी गई है, जिसे आठ दिन पहले हटाकर धारा 304 में तब्दील किया गया था।

शहीद जवान की पत्नी के घर एएसआई राजू सिंह का आना जाना था । शहीद जवान सिटी थाने में नियुक्त थे । एएसआई राजू भी इसी थाने में था । बाद में शहीद जवान का ट्रांसफर पलामू जिला में हो गया था । इसके बाद 2014 में शहीद जवान पलामू में नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे ।

डेड बॉडी या कहे  मृत शरीर  का नाम सुनते ही मन में तरह-तरह की बातें आने लगती हैं। लोग उसके पास जाने से डरते हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि कहीं वह डेड बॉडी उठ कर न बैठ जाए या फिर कहीं उन्हें भी अपने साथ न ले जाए।

मामले की जानकारी देते हुए कोडरमा एससी एम तमिल वानन ने बताया कि 11 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले के लिए सुपर विजन के लिए एसडीपीओ को निर्देश दिये गये है।

सावन का महीना पवन करे शोर',कभी ये गाना सावन आते ही लोगों की जुबान पर खुद-ब-खुद आ जाता था। आज वक्त ने ऐसी करवट ली है कि सावन तो आता है पर अपने रंग नहीं बिखेर पाता। जिस सावन के आते ही नववधु के पैर ससुराल से मायके की दहलीज तक पहुंचते थे।