jyotish

मान्यता है कि जिस घर में जानवर पाला जाता वहां सुख-शांति बनी रहती है।आजकल या पहले भी लोग घर में कोई भी पक्षी या जानवर पालते थे। इससे उस घर में मुसीबतें कम आती हैं या फिर आती हैं तो बड़ी आसानी से टल जाती हैं। बेजुबान जानवरों की सेवा और उनकी देखरख करने का शास्त्रों बड़ा महत्व माना गया हैं।

हर मनुष्य सुख शांति व समृद्धि के साथ  अच्छे और सुखी जीवन की कामन करते है। इसके लिए शास्त्रों में कई  नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी है।  वेद-पुराणों के कई खंड है इनमें ब्रह्मवैवर्त पुराण की बात कर रहे हैं बता दे कि  कुछ ऐसे नियम  है

माह –आषाढ़ ,तिथि –प्रतिपदा, पक्ष – कृष्ण,वार – शनिवार, नक्षत्र –ज्येष्ठा  ,सूर्योदय – 05:20, सूर्यास्त – 19.05 ,आज के दिन 12 राशियों के जीवन में कैसा रहेगा।

जीवन में खुशहाल और समृद्ध रहना है तो उन सभी आदतों को अपनाना चाहिए जो कि हमारे जीवन को सुरक्षित और सुंदर बनाती है। बुरी आदतें  जीवन को भी बुरा बना देती है। धर्मशास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार जानते हैं उन खराब आदतों के बारे में जिनसे दरिद्रता आती है।

नौ ग्रहों में शामिल राहु का नाम सुनते ही हम भयभीत हो जाते हैं। एक अजीब सा भय मन में आने  लगता है। ऐसे में कोई कहें कि राहुकाल चल रहा है तो दिमाग में पहला सवाल होता है क्या है इसका महत्त्व है। इसका प्रभाव।  क्यों हम लोग राहु काल में शुभ कार्य नहीं करते ?

हर किसी की इच्छा आज के समय में लग्जरियस लाइफ की होती है। इसे पूरा करने के लिए व्यक्ति कठिन परिश्रम भी करता है लेकिन इसके बाद भी उसकी हर इच्छा पूरी नहीं होती है। जो व्यक्ति की सबसे ज्यादा धन कमाने की होती है । क्योंकि धन का महत्व हर काल खंड में रहता है ।

जब चंद्रयान-2 चांद तक पहुंचने वाला था तब ज्योतिषफल बता रहे थे कि अमृत योग में चंद्रयान लैंड करेगा जो शुभ होगा व जल तत्व के लिए जीवनदायी भी रहेगा। लेकिन ऐसा होते होते रह गया है। वैसे भी विज्ञान को ज्योतिष से अलग नहीं कर सकते है। जहां विज्ञान मात खाता है वहां

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर कुछ खास उपाय किए जाए तो मनुष्य की कई मनोकामना की पूर्ति हो सकती है।  किसी भी सिद्धि प्राप्ति या मनोकामना पूर्ति के लिए चार रात सबसे सर्वश्रेष्ठ हैं। इनमें से जन्माष्टमी भी एक है। जन्माष्टमी पर आप ये उपाय कर सकते हैं-

जब हम कोई भी नया काम शुरु करते हैं तो उससे पहले शुभ समय देखते है। चौघडिया की गणना के आधार को घटी कहा जाता है। एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है

सावन की पूर्णिमा के दिन 15 अगस्त को रक्षा बंधन है इस बार के रक्षा बंधन ना तो भाई न ही बहन के लिए कोई इंतजार है। इस बार खास बात ये है कि दिनभर भाइयों कलाईयां बहनों की राखियों से सजती रहेगी। इस बार रक्षाबंधन भद्रा से मुक्त है। इसलिए सूर्यास्त से पहले तक राखी बांध सकते है।इस बार भद्राकाल न होने से पूरे दिन मुहूर्त रहेगा।