Kalyan Singh

30 मई, 2017 को इस आपराधिक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार व विष्णु हरि डालमिया पर आईपीसी की धारा 120 बी (साजिश रचने) के तहत आरोप तय किया था।

छह दिंसबर, 1992 को विवादित ढांचा ढंहाए जाने के मामले में कुल 49 एफआईआर दर्ज हुए थे। एक एफआईआर फैजाबाद के थाना रामजन्म भूमि में एसओ प्रियवंदा नाथ शुक्ला जबकि दूसरी एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज कराई थी।

लखनऊ : पिछले पांच दशकों से यूपी भाजपा की राजनीति में केन्द्र बिन्दु रहे कल्याण सिंह अब एक बार फिर नई भूमिका में है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल रहने के बाद अब वह एक सामान्य कार्यकर्ता की भूमिका में इस बार सक्रिय हुए हैं। कहने को भले ही …

सीबीआई की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश एस के यादव ने 9 सितम्बर केा सीबीआई को कल्याण सिंह के राज्यपाल पद से मुक्त होने संबधी आवश्यक कागजात पेश करने को कहा था। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम केार्ट के निर्देश पर इस केस के विचारण की सुनवायी दिन प्रतिदिन चल रही हैै।

अब कल्याण सिंह राज्यपाल पद से रिटायर हो गए हैं। यही वजह है कि सिंह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सिंह को तुरंत आरोप के रूप में कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। अब कोर्ट ने उनको समन जारी कर दिया है।

बाबरी विध्वंस मामले में राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को समन जारी करने के लिए सीबीआई ने स्पेशल जज अयोध्या प्रकरण सीबीआई कोर्ट लखनऊ की अदालत में सोमवार को आवेदन किया है।

सीबीआई ने बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में लखनऊ की विशेष अदालत में चल रहे विचारण के दौरान सोमवार केा एक अर्जी डालकर पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को बतौर अभियुक्त तलब करने की मांग की है।

यूपी के दो बार मुख्यमंत्री और पांच साल तक राजस्थान का राज्यपाल रहने के बाद कल्याण सिंह एक बार फिर भाजपा की सक्रिय राजनीति में वापस आ गये। 87 वर्षीय कल्याण सिंह 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं।

सिंह कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी का एक बड़ा चहरा हैं, बाबरी मस्जिद विध्वंस में विवादास्पद काम रहा है। जब विवादित ढांचे का विध्वंस हुआ था तब सिंह ने इसकी ज़िम्मेदारी ली थी। यही नहीं, इसके साथ सिंह ने सरकार से इस्तीफा भी दे दिया।