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महामारी की सबसे बुरी मार तो गरीबों पर पड़ी है, जिनका काम-धंधा सब छूट गया और अब दो वक्त की रोटी के लिए मारा-मारा फिरना पड़ रहा है।

शनिवार का दिन कन्नौजवासियों के लिए मुसीबत बनकर आया। पहले तेज आंधी और उसके बाद हुई मूसलाधार बारिश ने जिलेभर में खूब तबाही मचाई।

पहली बार एक साथ 12 लोग कोरोना संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। 12 पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वालों की तलाश शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में मजदूरों को मनरेगा के तहत एक फीसदी परिवारों को भी 100 दिन का काम नहीं मिला है। दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन सब हवा-हवाई साबित होते हैं।

गुजरात से इत्रनगरी आई स्पेशल श्रमिक टे्रन से रोडवेज बस के इंतजार में जौनपुर के निवासी अरविंद का परिवार जीटी रोड किनारे बैठा था। पत्नी बोतल की ढक्कन में पानी निकालकर छोटे-छोटे बच्चों को पिला रहीं थीं।

गुजरात के बड़ोदरा से श्रमिक स्पेशल ट्रेन उत्तर प्रदेश के 58 जिलों के कुल 1815 महिला, पुरुष, बच्चों व बुजुर्गों को लेकर इत्रनगरी (कन्नौज) पहुंची।

उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में वैश्विक कोरोना महामारी बहुत तेजी से फैल रही है। कन्नौज जिले में लगातार दूसरे दिन कोरोना के पांच नए केस सामने आए हैं। चार दिनों में 16 नए केस सामने आने से हड़कंप मच गया है।

जनपद के सभी कंट्रोल रूम में 50 दिनों के लाॅकडाउन में कुल 12427 शिकायतें प्राप्त हुयी हैं, जिनके निस्तारण की कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की गयी हैं।

रोजी-रोटी की तलाश में बड़े शहरों का रुख किए युवक जब वापस लौट रहे हैं तो इत्र नगरी में कोरोना महामारी घोलने लगे हैं। ये किसी खतरे से कम नहीं है। हर रोज कामगारों के आना जारी है।

नर्स पहले तो कोरोना वार्ड में ड्यूटी करती हैं फिर घर पर अपने दो बच्चों और पति के साथ मास्क भी सिलती हैं। बाद में फ्री में उनका वितरण भी।