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जातक की कुंडली में शनि जिस भाव में है, उसकी स्थिति के अनुसार जीवन में सुख-दुख मिलते हैं। जानिए  कुंडली में शनि की स्थिति के अनुसार जातक के लिए ग्रह शुभ है या अशुभ…...

आज के समय में राजनीति एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। प्रसिद्वि,पैसा और सुख—सुविधाएं हासिल करने के लिए ही आज के समय में ज्यादातर लोग राजनीति में आना पसंद करते हैं, लेकिन हर कोई इंसान राजनीति में पूरी तरह सफलता प्राप्त नहीं कर पाता, जिसकी उसे चाहत होती है।

ज्योतिष के अनुसार 360 अंश का राशि-चक्र है जो 12 भावों में बंटा है।  कुंडली में पहला भाव लग्न भाव होता है उसके बाद शेष 11 भावों का अनुक्रम आता है।

जन्म कुंडली में सभी नौ ग्रह, अपनी-अपनी तरह से जातक को प्रभावित करते, उसके जीवन पर असर डालते हैं। अगर शुभ ग्रह अच्छी स्थिति में हैं तो इसका फल भी जातक को मिलता है और अशुभ ग्रह अच्छी स्थिति में हैं तो इसका नकारात्मक परिणाम भी भुगतना पड़ता है। कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है,

दुनिया में कोई ऐसा इंसान होगा जिसे किसी व्यक्त, जिसे किसी तरह की कोई टेंशन न हुई हो। इन्हीं टेंशन के चलते कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए लोग कई दवाईयां आदि खाते हैं मगर फिर भी इससे पीछा नहीं छुड़वा पाते। बता दें कि डिप्रेशन का कारण सिर्फ उनकी परेशानियां नहीं, बल्कि उनकी कुंडली में मौज़ूद ग्रह भी होते हैं।

ज्योतिष के माध्यम से हम भविष्य से जुड़ी बातें जानते हैं।  कुंडली में बारह भाव होते हैं और इन भावों में स्थित सभी नौ ग्रह के अलग योग बनते हैं। ग्रहों की स्थिति और अन्य ग्रहों के साथ के आधार पर ही व्यक्ति के सुख-दुख और धन संबंधी मामलों पर विचार किया जाता है। जानते हैं कुंडली के 7 ऐसे खास योग, जो धन संबंधी बातें से जुड़े हुए हैं…

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का महत्व बहुत अधिक है। इनका जीवन पर अच्छा व बुरा दोनों प्रभाव पड़ता है। चाहे सौर मंडल का कोई भी भी ग्रह हो अगर जातक की कुडंली में सही जगह पर नहीं है तो ऐसे जातक को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

मनुष्य का व्यवहार समय समय पर बदलता रहता है। कई बार खुद के व्यवहार पर आश्चर्य भी होता है आप किसी के साथ तो बहुत विनम्र तो किसी के साथ न चाहते हुए भी कठोर हो जाते हैं। दरअसल हम अपने आस-पास के लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार करते हैं।

चन्द्रमा मन का कारक है। धर्म में 'चंद्रमा मनसो जात:'। इसकी राशि कर्क है। कुंडली में चंद्र अशुभ होने पर मां को किसी भी प्रकार का कष्ट या सेहत का खतरा होता है, दूध देने वाले पशु की मृत्यु हो जाती है। स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है। घर में पानी की कमी आ जाती है या नलकूप, कुएं आदि सूख जाते हैं।

आज के समय में लोगों का रिलेशनशिप पर ज्यादा विश्वास नहीं रहा है, लेकिन ये आज की ही सिर्फ बात नहीं है, जब से सभ्यता पनपी है लोगों के अवैध संबंध भी बने है । ये अलग बात है कि आज आसानी से किसी के अवैध रिलेशनशिप की जानकारी हो जाती है।  यदि शुक्र मेष,सिंह, धनु, वृश्चिक में हो या नीच का हो