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चीन की गुस्ताखियां मई के महीने से ही शुरू हो गई थी, और अभी तक बरकरार हैं। ऐसे में चीन के साथ बीते कई महीनों से चल रहे तनाव के बाद भारत ने परमाणु कौशल को बढ़ाते हुए 3 अक्टूबर को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की उन्नत संस्करण शौर्य मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।

रेलवे स्टेशन स्थित तीनों डिपो की तरफ से दस हजार से अधिक लीटर की बिक्री करने वाले कुछ पेट्रोल पंपों को तेल की सप्लाई कर दी गई, लेकिन इसके बाद सप्लाई को बंद कर दिया गया।

कोरोना संकट के बीच इस साल भूकंप के झटकों के बार बार आने से लोग सहमे हुए हैं। विशेषज्ञ भी चिंता में हैं कि आये दिन भूकंप आना किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं।

लद्दाख में भारत -चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई तो सीमा पर जवानों की तैनाती तो बढ़ाई ही गयी, साथ ही वायु सेना ने भी मोर्चा संभालते हुए लेह में युद्धक हेलीकॉप्टरों की तैनाती की।

चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 1000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलें तैनात करना शुरू किया है। भारत इन मिसाइलों को सीमा पर तैनात कर चीन के साथ ही पाकिस्तान को भी सबक सिखाना चाहता है।

चीन पर करीब से नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना वायरस के कारण चीन में खाद्यान संकट पैदा हो गया है। जो धीरे-धीरे और बढ़ता जा रहा है।

दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करने के लिए सैन्य स्तर पर वार्ता जारी है। इस बीच वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया (Air Chief Marshal RKS Bhadauria) ने कहा कि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में अभी ना तो युद्ध की स्थिति है और ना ही शांति की।

झटकों से दहल उठी धरती पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर दिन कहीं न कहीं झटकों से थर्राने की खबर आती रहती हैं। ऐसे में लद्दाख में एक फिर भूकंप ने लोगों को सहमा दिया है।

भारतीय सेना की तरफ से पूरी तैयारी कर ली गई है ताकि चीन की किसी भी उकसावे वाली हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। पूर्वी लद्दाख के चुमार डेमचौक सरहद पर भारतीय सैनिक और टैंक चीन के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार है।