LOVE JIHAD law

बीते दिनों देश के 104 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दावा किया है कि धर्मांतरण विरोधी कानून के कारण उत्तर प्रदेश नफरत की राजनीति का केंद्र बन गया है।

सरकार की तरफ से संबंधित विभागों को कानूनी रूप से 'लव जिहाद' के खिलाफ कानून बनाने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि इससे पहले यूपी की योगी सरकार और मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार पहले ही लव जिहाद के खिलाफ कानून लागू कर चुकी है।

मध्य प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ विधेयक को शिवराज कैबिनेट ने शनिवार को मंजूरी दे दी। 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020' के अंतर्गत लव जिहाद के खिलाफ 19 प्रावधान रखें गए हैं।

हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष लाल ऋषिनाथ शाहदेव ने कहा कि, मंच अंतर धार्मिक विवाह के विरुद्ध नहीं है। बल्कि अपनी पहचान छिपाकर शादी करने के ख़िलाफ़ है। उन्होने कहा कि, मंच लव जिहाद के मामलों को लेकर काम कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में बरेली के बाद मुजफ्फरनगर में भी लव जिहाद का मामला सामने आया है। महिला के पीड़ित पति ने मंसूरपुर थाने में उत्तराखंड राज्य के दो मुस्लिम युवकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून-2020 के तहत FIR दर्ज कराई है।

अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि मायावती को क्या यह जानकारी है कि लव जिहाद की ज्यादा शिकार आर्थिक रुप से कमजोर और दलित जातियां ही होती हैं। क्या इन जातियों को सम्मान से जीवन जीने का हक नहीं है।

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने आज मुजफ्फरनगर पहुंचकर लव जिहाद पर बोलते हुए कहा कि बहुत जल्दी लव जिहाद को लेकर एक सख्त कानून बनने जा रहा है, जिसे कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या एयरपोर्ट को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है। योगी सरकार ने अयोध्या एयरपोर्ट का नामकरण करते हुए उसका नाम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा किए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आखिरकार मंगलवार को अपने वादे पर खरे उतरते हुए लव जिहाद पर हथौड़ा चला दिया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में शादी के लिए अवैध धर्मांतरण रोधी कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि धर्म परिवर्तन कर धोखे से विवाह रचाने पर कड़े दंड की व्यवस्था की गयी है। ऐसे मामलों में एक से दस साल की सजा होगी।