mahatma gandhi

बापू के बारे में कौन नहीं जानता। अपने चमत्कारिक व्यक्तित्व के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगें। गांधी जी के संपर्क में रहने वाले अपने को बहुत धन्य और खुशनसीब समझते हैं, कि उनके ऊपर गांधी जी की छत्रछाया थी कभी।

धर्म की ताक़त का इस्तेमाल कर महात्मा गांधी भारत को जगाना चाहते थे। लेकिन अधर्म करने वालों को रोके कौन? रोके कैसे? ऐसे लोग जो भाषा समझते है, वह गांधी की नहीं हो सकती। लेकिन जो भाषा बोलते हैं वह भी गांधी के लिए नहीं हो सकती। आसमान पर थूकने की कहावत का फल भुगतना पड़ता है।

महात्मा गांधी के चश्मे की नीलामी से पहले उम्मीद जताई थी कि ये करीब 14 लाख रुपये से अधिक क़ीमत में बिकेगा। हालाँकि चश्मा ढ़ाई करोड़ रूपए से ज्यादा में बिका।

ये तो सभी जानते है कि भारत का स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि भारत की आजादी की घोषणा इससे काफी पहले 21 अक्टूबर 1943 को ही हो गई थी और दुनिया के कई देशों ने भारत की इस आजादी को मान्यता भी दी थी।

ब्रिटेन सरकार बापू को एक बड़ा सम्मान देने जा रही है। भारतीय नोटों के बाद अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ब्रिटेन के सिक्कों पर भी नजर आएंगे।

सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रीय गौरव के विषयों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हवाले न करे। लोगों को इनके प्रति आदर रखने के लिए कठोर क़ानून बनाये। मजबूर करे। तैयार करे। इसके बिना एक गौरवशाली भारत का निर्माण नहीं हो सकता है। गौरवशाली भारत का निर्माण हर सरकार और व्यक्ति का कर्तव्य होना चाहिए ।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सोनिया ने कहा कि जब आलोचना किसी आंदोलन को दबाने में असफल हो जाती है तो उसको स्वीकृति और सम्मान मिलने लगता है।

अमेरिका में नागरिक जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद शुरू हुआ उपद्रव थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपद्रवियों ने सड़क से लेकर व्हाइट तक को निशाना बनाया है।

इसी तरह महात्मा गांधी की कुछ अस्थियों का विसर्जन प्रमुख तीर्थों में किया गया था। प्रयागराज संगम में बहुत विशाल आयोजन किया गया था जिसमें लाखों लोगों की मौजूदगी में यह विसर्जन हुआ था जिसमें स्वयं जवाहर लाल नेहरू भी उपस्थित रहे थे।