Mahatma Gandhi Birthday

गत 23 नवंबर 1929 को जनआंदोलन खड़ा करने को जब औरैया में महात्मा गांधी आए तो उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां गांधी जी ने एसबी स्कूल (अब तिलक इंटर कालेज) में रात भी गुजारी थी। यही नहीं कालेज में पौधारोपण भी किया।

बापू की प्रेरणा से मनकापुर के राजा भी आजादी के जंग में कूद गए। राजा रघुराज सिंह पर गांधी जी के विचारों का इतना प्रभाव पड़ा कि वे उसमें डूब गए और लोग उन्हें गांधी राजा कहने लगे थे। बलरामपुर के महाराजा ने भी गांधी जी स्वागत किया और चार हजार की थैली भेंट की थी।

सुभाषचंद्र बोस के मन में महात्मा गांधी की नीतियों उनके सत्य अहिंसा के व्रतों के लिए अभूतपूर्व सम्मान था। इसका उदाहरण है कि जब 1944 में उन्होंने देश की पहली स्वतंत्र सरकार बनाई जिसे 14 देशों ने मान्यता भी दी। उस समय रेडियो सिंगापुर से एक संदेश में उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया।

बापू के बारे में कौन नहीं जानता। अपने चमत्कारिक व्यक्तित्व के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगें। गांधी जी के संपर्क में रहने वाले अपने को बहुत धन्य और खुशनसीब समझते हैं, कि उनके ऊपर गांधी जी की छत्रछाया थी कभी।

दुनिया भर के लोग मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी के नाम से ही जानते हैं पर बहुत कम लोगो को पता होगा कि महात्मा गांधी को इस नाम से सर्वप्रथम लखनऊ में ही पहचान मिली। इसके पहले लोग उन्हे बैरिस्टर गांधी ही कहा करते थें।

क्या आप जानते है कि इस खादी आंदोलन की शुरूआत कैसे हुई। तो हम आपको बताते है खादी के इस वस्त्र से जुडे़ गांधी जी के इस खादी आंदोलन के बारे में जिसने आम इंसान को यह सिखा दिया कि बड़ी से बड़ी चुनौती को संगठित होकर दूर किया जा सकता है।