Mahatma Gandhi Jayanti

राज्य निर्माण के लिए बलिदान देने वाले आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आन्दोलनकारियों के सपनों के उत्तराखण्ड की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।

आज देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है। इस मौके पर महात्मा गांधी का वेश बनाकर पहुंचे सपा कार्यकर्ता यह संदेश देने में कामयाब रहे कि योगी सरकार अहिंसक विरोध प्रदर्शनों को भी हिंसा से कुचल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विजय घाट पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धांजलि दी। बता दें कि आज लाल बहादुर शास्त्री की 116वीं जयंती है, इस मौके पर पीएम ने उन्हें नमन किया।

महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने से पहले दक्षिण अफ्रीका में भी मानवाधिकारों के लिए काफी संघर्ष किया था। अंग्रेजों के चंगुल से भारत को आजाद कराने के लिए उनका संघर्ष बाद में पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया।

गत 23 नवंबर 1929 को जनआंदोलन खड़ा करने को जब औरैया में महात्मा गांधी आए तो उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां गांधी जी ने एसबी स्कूल (अब तिलक इंटर कालेज) में रात भी गुजारी थी। यही नहीं कालेज में पौधारोपण भी किया।

बापू की प्रेरणा से मनकापुर के राजा भी आजादी के जंग में कूद गए। राजा रघुराज सिंह पर गांधी जी के विचारों का इतना प्रभाव पड़ा कि वे उसमें डूब गए और लोग उन्हें गांधी राजा कहने लगे थे। बलरामपुर के महाराजा ने भी गांधी जी स्वागत किया और चार हजार की थैली भेंट की थी।

सुभाषचंद्र बोस के मन में महात्मा गांधी की नीतियों उनके सत्य अहिंसा के व्रतों के लिए अभूतपूर्व सम्मान था। इसका उदाहरण है कि जब 1944 में उन्होंने देश की पहली स्वतंत्र सरकार बनाई जिसे 14 देशों ने मान्यता भी दी। उस समय रेडियो सिंगापुर से एक संदेश में उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया।

इन तमाम बातों के बीच ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक बंद रहने के दौरान बाकी सारी ऑनलाइन सेवा और एटीएम संबंधित सेवाएं सुचारू रूप से संचालित होगी।

बापू के बारे में कौन नहीं जानता। अपने चमत्कारिक व्यक्तित्व के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगें। गांधी जी के संपर्क में रहने वाले अपने को बहुत धन्य और खुशनसीब समझते हैं, कि उनके ऊपर गांधी जी की छत्रछाया थी कभी।

दुनिया भर के लोग मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी के नाम से ही जानते हैं पर बहुत कम लोगो को पता होगा कि महात्मा गांधी को इस नाम से सर्वप्रथम लखनऊ में ही पहचान मिली। इसके पहले लोग उन्हे बैरिस्टर गांधी ही कहा करते थें।