Malnutrition

अप्रैल से लेकर अगस्त माह तक एनआरसी ने 32 कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाकर उनके चेहरों पर मुस्कान लौटाने का कार्य सराहनीय कार्य किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 अगस्त 2020 को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि राष्ट्र और पोषण बहुत ही निकटता से जुड़े हुए हैं।

7 सितंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पोषण माह को लेकर इस बार डिजिटल प्लेटफार्म का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। कुपोषित बच्चों और एनीमिया की शिकार गर्भवती महिलाओं को इससे मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बरसों से सहजन के गुणकारी लाभ के बारे में लोग जानते हैं। यह सर्दियों में बाजार में बिकती हुई दिखाई देती है लेकिन इसके फायदे होने के बाद भी लोग इसका सेवन नहीं करते हैं। गर्भवती महिलाओं व कम आयु के  बच्चों के लिए यह वरदान है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

मध्य प्रदेश: कुपोषण का गढ़ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश का श्योपुर जिले का एक गांव गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले आदिवासी परिवारों का गांव था। यहां के आदिवासी परिवारों के पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। जो भी थोड़ी जमीन और जेवर बचे थे सब गिरवीं रखे हुए थे लेकिन …

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कुपोषण और इससे संबंधित समस्याओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। शनिवार को जारी सरकारी व्यक्तव्य के मुताबिक, “एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कुपोषण की मौजूदा स्थिति और इससे संबंधित अन्य समस्याओं पर शुक्रवार को चर्चा हई। इस बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय, …

नई दिल्ली : हाल ही में अहमदाबाद के प्रमुख सदर अस्पताल में तीन दिन में 18 नवजात शिशुओं की मौत के बाद इसके कारणों को लेकर पूरे देश में चर्चा होने लगी, जिसमें एक बात सामने आई कि उनमें से ज्यादातर बच्चे सामान्य से कम वजन के थे। इस तरह वे कमजोर भी थे। इससे …

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में शरण लिए छह लाख के करीब रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों में से करीब 58 फीसदी बच्चे हैं और ये गम्भीर कुपोषण का शिकार हैं।

यूपी के 39 जिलों के गांवों को कुपोषण मुक्‍त गांव घोषित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। गांवों में छह महीने से तीन साल तक की उम्र वर्ग के कमजोर बच्‍चों का मेडिकल टेस्ट होगा।

कक्षा दो के बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर में एक दिन आगे तक की दर्ज मिली। पूरे स्कूल में भले ही 4 बच्चे हों, लेकिन रजिस्टर में हर कक्षा में बच्चों की खासी तादाद है। मिड डे मील के नाम पर बच्चों को कभी भोजन नहीं मिला और न फ्रूट डे पर कभी कोई फल आया ।कागजों में बच्चों की उपस्थिति दिखा कर इनके हिस्से का खाना प्रधान और अध्यापक हजम कर रहे हैं।