masood azhar

बाराबंकी के एक निजी स्कूल के बाहर शुक्रवार को नोटिस बोर्ड पर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के नाम का धमकी भरा पत्र चस्पा होने से हड़कंप मच गया। आतंकी मसूद अजहर के नाम पर लिखा गए पत्र में स्कूल मालिक से 15 लाख रुपये की मांग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मसूद का भाई अब्दुल रऊफ असगर इन दिनों जैश का प्रभारी है। सूत्रों की माने तो, मसूद अजहर किडनी खराब है, और ज्यादातर वक्त वह अपने क्वॉर्टर में ही आराम करते हुए बिताता है।

'UAPA' एक्ट के तहत मसूद अजहर, हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और जकीउर रहमान लखवी को आतंकी घोषित किया गया। रोचक है कि भारत सरकार की ओर से राजपत्र जारी कर इसका एलान किया गया।

मशहूर आतंकवादी जैश ए मोहम्मद सरगना मसूद अजहर के भाई इब्राहिम अजहर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में देखा गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, इब्राहिम अजहर के साथ 15 प्रशिक्षित आतंकी भी हैं।

पाकिस्तान में एक्टिव आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सगरना मसूद अजहर को लेकर बड़ी खबर आ रही है। सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया जा रहा है कि रावलपिंडी शहर के सैन्य अस्पताल में हुए बम धमाके में मसूद अजहर समेत 10 आतंकी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ऐसे कुछ प्रमुख देश हैं जिन्होंने पाकिस्तान के उसकी सरजमीं से आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में विफल रहने और आतंकवादी सरगनाओं हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामले दर्ज नहीं करने पर चिंता जतायी है।

सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के प्रस्ताव पर से चीन की ओर से तकनीकी रोक हटाए जाने के बाद अजहर को एक मई को काली सूची में डाल दिया था। इसे भारत की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दावों पर सवाल उठाये हैं। मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया कि मसूद अजहर को यूएन द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित होने को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी जीत बताकर इसका चुनावी लाभ लेने को आतुर हैं।

इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति ने बुधवार को अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।

यूनाइटेड नेशंस ने जैश-ए-मोहम्‍मद चीफ मसूद अजहर को ग्‍लोबल आतंकी घोषित कर दिया है। लेकिन हमें फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि इसका कोई बड़ा फायदा होने वाला है, क्योंकि कई ऐसे आतंकी सरगना है जो यूएन से बैन होने के बाद भी पाकिस्‍तान से अपने ग्रुप को बेखौफ संचालित कर रहे हैं।