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कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने मजदूरों को काम देने के लिए मनरेगा योजना को तेज गति दी। योजना के तहत जिले के भी हर ब्लॉकों में मनरेगा के तहत कार्य कराया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री डा. महेन्द्र सिंह ने विभागीय अधिकारियों को कोविड-19 के प्रकोप के चलते विभिन्न राज्यों से उत्तर प्रदेश में लौट रहे प्रवासी मजदूरों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने के निर्देश दिये है।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में मजदूरों को मनरेगा के तहत एक फीसदी परिवारों को भी 100 दिन का काम नहीं मिला है। दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन सब हवा-हवाई साबित होते हैं।

सुरसा विकासखंड के कुड़वा ग्राम में 165 श्रमिक सई नदी के 6 किलोमीटर क्ष्रेत्र में खुदाई का काम कर रहे हैं इनमें से लगभग 80 प्रवासी मज़दूर और महिलाएं है जो हरियाणा, पंजाब, दिल्ली ,गुजरात और मुंबई से आए हैं ।

मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रूपये के पैकेज मे से तकरीवन 2 लाख करोड़ रुपये छोटे और कमजोर तबके के लोगो को फौरी सहायता के रूप मे उपलब्ध कराये है। इसी मे शामिल है मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रूपये का आवंटन।

जनस्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा। इसके लिए रिफॉर्म्स किए जाएंगे। ग्रामीण स्तर पर ऐसी सुविधाएं देने की आवश्यकता है जो महामारी की स्थिति में लड़ने की क्षमता हो। इसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा।

ग्राम्य विकास विभाग की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के मजदूरों की हाजिरी अब मोबाइल मानिटरिंग सिस्टम से की जायेगी।

राजस्थान सरकार द्वारा मनरेगा (MNREGA) के तहत देय मजदूरी दर को बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा बदलते मौसम को देखते हुए काम के समय में भी बदलाव किया गया है।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश भर में लागू लाकडाउन के दौरान शहरी क्षत्रों से ग्रामीण इलाकों में लौटे लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

जिले के कटरा विकास खण्ड के कर्ताधर्ताओं ने हर सरकार में सत्ताधारियों की गोद में बैठकर मनरेगा योजना में जमकर लूटपाट और बंदरबांट किया। तमाम बार इसके खिलाफ आवाज उठी लेकिन सत्ता के दबाव में कार्यवाही सिफर रही। अब अपर आयुक्त मनरेगा के नेतृत्व में जांच कर रही शासन की टीम ने करोड़ों रुपए के बंदरबांट का मामला पकड़ा तो यह ब्लाक एक बार फिर चर्चा में है।