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अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला हिंदू पक्ष में सुनाया है। सारे विवादित तथ्यों का साफ व्याख्यान देने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद अब विवादित स्थल पर ही मंदिर बनेगा। 

राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है यानी विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन अलग स्थान पर देने को कहा है।

राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है यानी विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन अलग स्थान पर देने को कहा है।

राम जन्मभूमि विवाद पर मामले में हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हिंदू पक्ष ने कहा है कि अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण हो।

इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस अगले महीने 18 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि उससे पहले इस ऐतिहासिक मामले पर फैसला आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर बुधवार को सुनवाई खत्म हो गई है। पहले हिंदू और फिर मुस्लिम पक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत में अपनी-अपनी आखिरी दलीलें रखीं। आखिर में मुस्लिम पक्ष ने दलीलें रखीं। इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी हो सकती है। देश की सर्वोच्च अदालत में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपनी-अपनी आखिरी दलील रखेंगे। अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा से एक दिन पहले पूरी होगी।

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी हो सकती है। देश की सर्वोच्च अदालत में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपनी-अपनी आखिरी दलील रखेंगे। अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा से एक दिन पहले पूरी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि देश में समान नागरिक आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने के लिए अभी तक कारगर प्रयास नहीं किए गए। देश की सर्वोच्च अदालत ने गोवा के एक संपत्ति विवाद मामले की सुनवाई के दौरान ये बात कहीं।