mystery

इस पिरामिड में राजाओं के मृत शरीर को दफनाया जाता था । यह शव खराब ना हो सुरक्षित रहे इसके लिए इन शवों पर एक किस्म के पदार्थ लगा कर दफनाया जाता था। इन शवों को ममी कहा जाता हैं। इन शवों के साथ कपडे , गहनें, खाने के सामान , संगीत यंत्र, और कभी-कभी तो ऐसा हो जाता था की शवों के साथ दास दासियों को भी दफना दिया जाता था।

कुछ लोग इस जंगल में घूमने आये और कुछ ही समय के लिए जंगल के अंदर गए और गायब हो गए । किसी को कुछ याद नहीं था कि वह कहां गायब हो गए थे। वहां के लोगों को अजीब और डरवानी आवाजें सुनाई देती हैं। लोगों का मानना हैं कि इस जंगल में भूत हैं। वहां के लोग जंगल में पैर तक नहीं रखते हैं।

बॉलीवुड की रंगीन दुनिया में दिव्या भारती उन कलाकारों में गिनी जाती है जिनका करियर महज कुछ सालों का रहा, लेकिन उन सालों में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। महज तीन साल के एक्टिंग करियर में दिव्या भारती ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। माना जाता था कि

बॉलीवुड की रंगीन दुनिया में दिव्या भारती उन कलाकारों में गिनी जाती है जिनका करियर महज कुछ सालों का रहा, लेकिन उन सालों में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। महज तीन साल के एक्टिंग करियर में दिव्या भारती ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

पुराने जमाने से एक परंपरा चली आ रही है कि यदि किसी के सिर पर कौआ बैठ जाए तो वह अपने रिश्तेदार को झूठा पत्र लिखता है कि उसकी मृत्यु हो गई है। इस प्रकार की खबर सुनकर परिजन शोक करते है।

हिंदू धर्म में लाल धागे को हाथ में बांधने वाले कलावे के रूप में देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, हाथ में बंधा हुआ कलावा (रक्षा, मौली) हमेशा रक्षा करता है और बुरे संकटों से बचाता है। लेकिन इसके अलावा आर्थिक समस्याओं से लेकर धन हानि, मान सम्मान और प्रतिष्ठा बनाए रखने में लाल धागे का उपाय विशेष रूप से कारगर है।

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को माताएं जिउतिया व्रत स्वस्थ संतान और उसकी लंबी आयु  के लिए व्रत रखती है ये व्रत हर पुत्रव्रती महिला रखती है। इस बार 21 और 22 सितंबर को जिउतिया का व्रत रखेंगी। इस व्रत में निर्जला व निराहार रहना पड़ता है।

गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की  मूर्ति स्थापित की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। सर्वप्रथम पूज्य  भगवान गणेश सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी की समाप्ति पर उनकी प्रतिमा को पानी में विसर्जित किया जाता है। गणेश विसर्जन की शुरूआत गणेश चतुर्थी के अगले दिन से हो जाती है।

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है जो सोलह कलाओं से सुशोभित है। उनकी बांसुरी कला की तो पूरी दुनिया दिवानी रही है । कहते हैं कि जब कृष्ण के मुख से बांसुरी की धून निकलती थी तो जीव-निर्जीव सब झूम उठते थे। मोरपंख की तरह ही श्रीकृष्ण के हाथों में सदैव बांसुरी रहती थी।

मैत्रायणी संहिता में नारद को आचार्य के रूप में सम्मानित किया गया है। कुछ स्थानों पर नारद का वर्णन बृहस्पति के शिष्य के रूप में भी मिलता है। अथर्ववेद में भी अनेक बार नारद नाम के ऋषि का उल्लेख है। भगवान सत्यनारायण की कथा में भी उनका उल्लेख है।