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ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता हैं क्योंकि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस साल यह पर्व 1 जून 2020, सोमवार को पड़ रहा हैं। इस दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व माना जाता हैं जो सभी पाप को हरने वाला होता हैं। स्नान के साथ-साथ इस दिन दान-पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सृष्टि के दर्शन को लोक तक पहुंचाने का दायित्व ऋषि समुदाय का ही था। उन्होंने इस कार्य को बहुत ही लगन व निष्ठा से किया और इतनी मज़बूत नींव तैयार की जिससे आज भी सृष्टि में सनातन संस्कृति विद्यमान है। 3 सितंबर को पड़ने वाला ऋषिपंचमी व्रत उन्ही दार्शनिक तत्वज्ञानी  महामनीषियों की पूजा का दिन है।

सावन शुरु हो चुका है और पूरा माहौल शिवमय है। हर तरफ बम भोल के नारे गुंजायमान है। लोग इस मास शिव की पूजा, व्रत  करते हैं मंदिर जाते है। जो लोग भगवान को मानते हैं उनमें विश्वास करते हैं, वे मंदिर जाने के महत्व को जानते हैं। कहते हैं कि मंदिर जाने से ना केवल नकारत्मक शक्तियां दूर रहती हैं बल्कि मन की शांति बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

भगवान शिव शंकर का प्रिय महिना यानी सावन का महीना शुरु हो चुका है। हर साल सावन  के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग कांवड़ लेकर पदयात्रा करते हैं। कांवड़ यात्रा की पंरपरा की शुरुआत किसने और कब की थी। हर साल सावन के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग भारतभर से कांवड़ में गंगाजल लेकर पदयात्रा

गंगा दशहरा के बाद आने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन मान जाता है। क्योंकि इस दिन आपको भोजन के साथ पानी का भी त्याग करना पड़ता है।

कहते है बालक के भेष में आए भगवान विष्णु को इसी मौके का इंतजार था। उन्होंने तुरंत घर का दरवाजा अदंर से बंद कर लिया। जब भगवान शिव और माता पार्वती वापस लौटे तो उन्हें घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला।

न्यूयॉर्क : कांग्रेस सांसद व लेखक शशि थरूर के अनुसार, हिंदू एक अनोखा धर्म है और यह संशय के मौजूदा दौर के लिए अनुकूल है। थरूर ने धर्म के राजनीतिकरण की बखिया भी उधेड़ी। न्यूयॉर्क में जयपुर साहित्य महोत्सव के एक संस्करण में के बातचीत सत्र के दौरान गुरुवार को थरूर ने कहा, “हिंदू धर्म इस …

जयपुर:जो लोग भगवान को मानते हैं उनमें विश्वास करते हैं, वे मंदिर जाने के महत्व को जानते हैं। कहते हैं कि मंदिर जाने से ना केवल नकारत्मक शक्तियां दूर रहती हैं बल्कि मन की शांति बनाए रखने में भी मदद मिलती है। मंदिर में  सकारात्मकता और जीवंतता का आभास होता है जो मन, शरीर और …

जयपुर: सावन के महिने में वैद्यनाथ धाम में कांवडियों की भीड़  रहती है लोगों यहां कई किलोमीटर की यात्रा करके आते है। भगवान शिव शंकर का प्रिय महिना यानी सावन का महीना 28 जुलाई 2018 से जुरू हो रहा है। हर साल श्रावण के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग कांवड़ लेकर पदयात्रा करते …

जयपुर: हल्दी की माला को शास्त्रों में अत्यधिक पवित्र स्थान दिया गया है। हल्दी न केवल आयुर्वेद में उपयोगी है बल्कि ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी हल्दी की गांठ अत्यंत लाभकारी होती है भगवान गणेश और बृहस्पति देव की आराधना करने के लिए हल्दी की गांठ का उपयोग करना शुभ है। हल्दी की गांठ …