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आप सभी जानते होंगे कि अमेरिका की नासा ने 16 जुलाई, 1969 को मिशन 'अपोलो 11’ के तहत चंद्रमा पर पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को भेजा गया था। जब इंसान ने चांद पर कदम रखा, तो इस कामयाबी के संदर्भ में पृथ्वी के सभी देश काफी खुश नजर आये।

मानव सभ्यता का वो सबसे बड़ा दिन कोई कैसे भूल सकता है, वो दिन था जब अमेरिका की नासा ने 16 जुलाई, 1969 को मिशन 'अपोलो 11’ के तहत चंद्रमा पर पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को भेजा था। जब किसी इंसान ने पहली दफा चांद पर कदम रखा था।

ब्रह्मांड का एक क्षुद्रग्रह (पत्थर का विशाल टुकड़ा) पृथ्वी की तरफ तेजी से बढ़ रहा जो आने वाले दिनों में धरती के लिए मुसीबत बन सकता है। इस क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को 2000 QW7 का नाम रखा गया है। अगर यह पृथ्वी से टकराता है तो पूरी दुनिया में भारी तबाही मच सकती है।

जब ऐनी ने यह अपराध किया था, तब वह अंतरिक्ष में थीं। ऐसे में फेडरल ट्रेड कमीशन और पुलिस का कहना है कि यह अपराध उनके कार्य क्षेत्र से बाहर है क्योंकि ये अंतरिक्ष में हुआ है। इसलिए वह इस मामले में कुछ नहीं कर पाए।

लंदन: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है। यह तस्वीर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जारी की है। बता दें, 20 जुलाई 1969 को पहली बार चांद पर अपोलो-11 से नील आर्मस्ट्रॉन्ग, माइकल कॉलिन्स और एडविन एल्ड्रिन ने कदम रखा था। पूरी दुनिया ने इस घटना की 50वीं सालगिरह मनाई। …

नासा का कहना है कि ‘अर्तेमिस’ कार्यक्रम के तहत चांद पर उपकरण भेजने के लिए उसने अमेरिकी कंपनियों एस्ट्रोबॉटिक, इंट्यूटिव मशीन्स और ऑर्बिट बियॉड को चुना है।

कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट 2014 एमयू 69 (उपनाम अल्टिमा थुले) के न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान के नए साल 2019 पर उड़ान के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों के सिर्फ पहले सेट का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उस क्षेत्र के खगोलीय पिंड के विकास, भूविज्ञान और रचना के बारे में बहुत कुछ खुलासा किया गया है।

अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश को पूरा करते हुए नासा साल 2024 तक चंद्रमा पर कदम रखने में सक्षम होता है, तो अमेरिकी स्पेस एजेंसी प्रतिबद्ध है कि वह पहली महिला को चंद्रमा पर भेजेगी।

नासा की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच के अंतरिक्ष अभियान की अवधि में विस्तार होने के साथ ही अब वह अंतरिक्ष स्टेशन में 328 दिन बिताने एक नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार हैं।

अध्ययनकर्मियों ने 2003 से 2007 तक उपग्रह आधारित इन्फ्रारेड मेजरमेंट सिस्टम एआईआरएस (ऐटमॉसफेरिक इन्फ्रा रेड साउन्डर) के जरिए प्राप्त धरती के तापमान का आकलन किया।