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अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने ‘आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते’ के भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कोई भी उच्च-स्तरीय बातचीत तब-तक निरर्थक रहेगी जब तक इस्लामाबाद अपनी सरजमीं से आतंकवादी ठिकानों को नहीं हटाता।