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तब्लीगी मरकज मामले में जिन विदेशी नागरिकों की क्वारनटीन की अवधि समाप्त हो चुकी है, उनसे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूछताछ शुरु कर दी है।

देश भर में कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं लें रहा है। रोज बड़ी संख्या में नये केस मिल रहे हैं और मौत का आंकड़ा भी तेजी के साथ बढ़ता ही जा रहा है। अभी तक देश भर में जितने कोरोना के मामले मिले हैं। उनमें से एक बड़ी संख्या तबलीगियों की है। जो मरकज में छिपे हुए थे। 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को पूछा कि नयी दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति किसने दी थी। यह कार्यक्रम देश में कोरोना वायरस के बड़े केंद्र के रूप में उभरा है।

दिल्ली के निजामुद्दीन के तबलीगी जमात से कोरोना विस्फोट से जुड़ा अब बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस जांच के बाद पता चला कि मरकज में शामिल हुए करीब 160 मौलवी ऐसे थे, जिनमें कोरोनावायरस के लक्षण पता चले थे लेकिन फिर भी इसे नजरअंदाज किया किया और कार्यक्रम किया गया।

मौलाना साद का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी है। वह भारतीय उपमहाद्वीप में सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन तबलीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कंधलावी के पड़पोते हैं।

दक्षिण दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज के मामले के सामने आने के बाद भारत के हजारों लोगों पर कोरोना वायरस का संकट मंडरा रहा है। दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान धार्मिक सभा में भाग लेने के लिए वहां के मौलान पर एफआईआर भी दर्ज की है।

 निजामुद्दीन मरकज के धार्मिक कार्यक्रम में शामिल कई लोगों के कोविड-19 बीमारी से पीड़ित पाए गए। इसके बाद दिल्ली में कोरोना वायरस से संदिग्ध संक्रमितों की संख्या में अचानक कई गुना इजाफा हो गया है। इस कारण कोरोना से निपटने की प्रदेश की तैयारियों को गहर झटका लगा है।