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भाजपा सरकार सोमवार को लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इस संशोधन के जरिए 31 दिसंबर 2014 तक जो हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में आ चुके हैं, उन्हें नागरिकता प्रदान करने की राह खुल जाएगी।

नागरिकता कानून, 1955 के मुताबिक अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। इस कानून के तहत उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बगैर घुस आए हों या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन उसमें दी गई अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक जाएं।

दरअसल, ममता बनर्जी ने कहा कि 1971 से ही ये अधर में लटके हुए हैं और ना तो इनके पास जमीन है और ना ही घर। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि यह शरणार्थियों का हक है।

बोलने वाले यदा कदा आरोप लगाते ही रहते हैं। तो इस तरह के तमाम आरोपों और सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने साफ कहा कि इससे किसी भी धर्म को डरने की जरूरत नहीं है। गृहमंत्री यहीं पर नहीं रुके उन्होंने बड़ा एलान करते हुए कहा कि एनआरसी के आधार पर नागरिकता की पहचान सुनिश्चित की जाएगी और इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कश्मीर और नागरिकता विधेयक बिल के मुद्दे पर पर सदन में सदस्यों के सवालों के जवाब दिए।

दरअसल 'पोस्‍ट कोलोनियल असम' नामक पुस्‍तक के लॉन्चिंग समारोह में सीजेआई रंजन गोगोई ने एनआरसी का बचाव करते हुए कहा कि एनआरसी मौजूदा समय का दस्‍तावेज नहीं है।

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 288 मामलों की जांच करते हुए पाया कि 57 मामले में “विसंगतियां” शामिल थीं। कोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से कहा कि असम सरकार और उसके गृह और राजनीतिक विभाग के उप सचिव की एक रिपोर्ट के

उत्तर प्रदेश में एनआरसी लागू किए जाने की सुगबुगाहट के बीच अवैध घुसपैठियों की धरपकड़ के लिए अभियान तेज हो गया है।

हालांकि पाकिस्‍तान ने इसे महज बांग्‍लादेश की पीएम का हालचाल जानने के लिए बताया गया, दरअसल बांग्लादेश के पीएम का हाल ही में लंदन में आंखों का ऑपरेशन हुआ है।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रेशन (एनआरसी) को लेकर अपनी ओर से जारी निर्देशों को लेकर मंगलवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले विदेशी लोगों की जांच पड़ताल की इस कवायद को एनआरसी से जोड़े जाने से इनकार किया।