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भारत- जैसे उदार और लोकतांत्रिक देश में गाय के नाम पर किसी की हत्या हो जाए और किसी मुसलमान या ईसाई को मार-मारकर ‘जयश्रीराम’ बुलवाया जाए, इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है ?

पाकिस्तान के नेताओं की यह पहल दो घटनाओं के बीच हो रही है। एक तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी द्वारा पाकिस्तान को भूरी सूची में उतार दिया गया है, आतंक के कारण और दूसरा भारत द्वारा दक्षेस (सार्क) की जगह अब ‘बिम्सटेक’ (पूर्वी पड़ौसियों) पर अपना ध्यान टिकाने के कारण।

चुनावी माहौल में कभी यूपी के अपराजेय योद्धा मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले शिवपाल सिंह यादव खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं।

तकरीबन एक माह बाद आम चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी। चुनावी गरमाहट का अहसास हर आम ओ खास को होने लगा है। वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी हैं। पिछल पांच साल से मोदी देश से लेकर बाहर तक दहाड़ते नजर आए हैं औऱ विपक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की नाकाम कोशिश में लगा रहा है।

गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन प्रत्येक भारतवासी के मन में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति स्नेह और स्नेह की लहरें हिलोरें लेने लगती हैं। हम सभी जानते हैं कि संवैधानिक सभा के 389 सदस्यों द्वारा 2 साल, 11 महीने और 18 दिन में हमारे संविधान का प्रारूप बनाया गया था। संविधान सभा द्वारा 29 अगस्त 1947 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में इस प्रारूप समिति का गठन हुआ था।

खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर के पर पीएम की तस्वीर को लेकर विवाद हुआ इस साल खादी ग्रामोद्योग के आए कैलेंडर और डायरी में पीएम मोदी को चरखा काटते दिखाया गया है।

लखनऊ: देश बदल रहा है।  हम बुलट ट्रेन चलाने की कोशिश में जुटे हैंं, वहीं पुखरायां रेेल हादसे के महज 5 हफ्ते बाद ही यूपी के कानपुर में रूरा में एक और हादसा हो गया। एक तरफ  हम बुलट ट्रेन का सपना देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर ट्रेन हादसे थम नहीं रहे। कानपुर हादसे के …

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने एनएम ऐप के जरिए 500-1000 की नोटबंदी पर जनता की राय मांगी है। उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर एनएम ऐप के सर्वेक्षण में लोगों को हिस्सा लेने को कहां। सर्वे के जरिए वह यह जनना चहते है कि नोटबंदी पर लोगों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा …

अंग्रेज़ी बहुत अच्छी भाषा है। वह बड़ी समृद्ध है। उसमें बड़ा ऊंचा साहित्य है। वह हमारे पुराने मालिकों की भाषा है। हम कृतघ्न नहीं हैं। अपने गए-गुज़रे मालिकों की भाषा से इसीलिए हम पिछले 27 सालों से चिपके हुए हैं। अंग्रेज़ी भले ही हमसे अपना दामन छुड़ाना चाहती हो, हम उसे किसी तरह नहीं छोड़ना …

तुर्की: आधुनिकता के कैनवास पर इस्लाम को देखना हो तो टर्की आइए। इस देश की सुंदरता में अगर सिर्फ भाषा का फर्क हो जाए तो यह स्विट्जरलैंड की वादियों को मात दे सकता है। इस्तांबुल आधुनिकता और परंपरा का एक ऐसा संगम है जो कम ही देखने को मिलता है। तुर्की के एनटाल्या प्रांत में …