pangong lake

कई महीनों से लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव थमता हुआ तो दिखाई नहीं दे रहा है। बीते दिनों भारत और चीन के बीच कोर कमांडर लेवर की मीटिंग जोकि 11 घंटे से ज्यादा चली, और रात 11:30 बजे खत्म हुई।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जारी है। दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर एक दूसरे के सामने खड़ी हो गयी हैं।

भारतीय सेना ने पैंगोंग बैंक के साउथ इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाई तो चीन ने नॉर्थ की ओर हलचल तेज कर दी। लेकिन वो किसी तरह की चालाकी करने में सफल नहीं हो सका।

पिछले कई दिनों से भारत और चीन की तनातनी के चलते दोनों देशों के बीच वार्ता हुई। ऐसे में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 10 सितंबर को रूस में हुए समझौते से पहले चीनी और भारतीय सेना ने लद्दाख पैंगोंग त्सो वैली के उत्तरी किनारे पर 100-200 बार गोली चलाई थी।

एक ओर भारतीय सेना अपने कमांड और सभी फैसलों के लिए अभी भी रेडियो संचार पर निर्भर है तो वहीं दूसरी ओर चीनी सेना संचार तंत्र मजबूत करने के इरादे से ऑप्टिकल केबल फाइबर बिछाने में जुटी हुई है।

संचार तंत्र मजबूत करने के इरादे से उठाए जा रहे इस कदम से माना जा रहा है कि चीनी सेना का इरादा सीमा पर लंबे समय तक टिके रहने का है।

चीन ने ब्लैकटॉप हिल और आसपास के इलाके में भारी तैनाती शुरू कर दी है। चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यहां कोई मूवमेंट न हो और अगर हो तो उससे आसानी से निपटा जा सके।

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बीच भारतीय सेना के जवान फिंगर 4 पर भी पहुंच गए हैं, जहां वो चीनी सैनिकों से एक दम आमने सामने हें।

भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। चीन एक तरफ शांति की बात कर रहा, लेकिन उसकी सेना आक्रामता और उकसावे वाली हरकते कर रही है।

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना से मात खाने के बाद भी चीन अपनी शरारतों से बाज नहीं आ रहा है। रेंजांग ला के पास दोनों देशों के बीच ताजा गतिरोध के बाद चीन कुछ बड़ा करने की फिराक में जुटा हुआ है।