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ज्यादातर बच्चे स्कूल जाने के नाम से कतराते हैं पैरेंट्स उनके रोज़ के ना-नुकुर से परेशान होते हैं। कई बार तो वे समझ ही नहीं पाते कि बच्चा ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। बच्चे के मन में क्या चल रहा है ये जानने के लिए कुछ बातों समझनी जरूरी हैं।  कुछ ऐसी बातें, जो शायद बच्चे की ना का कारण हो।

बच्चों को लेकर माता-पिता की चिंता हमेशा बनी रहती है। बच्चे की हर गतिविधि पर माता-पिता पूरी तरह सचेत रहते हैं। बच्चा कब खाया ,कब पिया, कब क्या किया ना क्या- क्या। बच्‍चों को लेकर परिवार में कुछ ना कुछ परेशानी बनी रहती है। कभी बच्‍चे को बार-बार चोट लगती है तो कभी बच्‍चे का मन पढाई में नहीं लगता तब।

:बच्चे के स्वभाव का अंदाजा लगाना पैरेंट्स के लिए भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन उनके पसंदीदा रंग से उनकी पर्सनालिटी के बारे में लगा सकते है कि कब बच्चा खुश होते हैं तो कब दुखी। बच्चों का फेवरेट कलर उनके स्वभाव से जुड़े कई राज खोलता है।

बच्चों के लिए अपने मम्मी पापा ही सब कुछ होते हैं। पापा हर बच्चे का हीरो उसके पापा होते हैं। अच्छा पिता बनना आसान नहीं है क्योंकि जब एक पिता बनते हैं तो पुरानी बहुत सी आदतों में बदलाव लाने होते हैं।एक अच्छा पिता बनना आसान नहीं है।

आगरा:  आगरा की स्पेशल जज (पोक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने दुष्कर्म के मामले में 14 साल की सजा सुनाई है। 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले सफाई कर्मचारी गौरु उर्फ गौरव वाल्मीकि को मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर 14 साल कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड भी …

राजधानी के आशियाना थाना क्षेत्र में एक कलयुगी पिता ने अपने डेढ़ माह के मासूम बेटे को पत्नी की गोद से छीनकर पटक-पटक कर मार डाला। उसके बाद हत्यारा पिता मौके से फरार हो गया।

ऐसे में इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। उचित देखभाल के अभाव में यह छोटे बच्चे अक्सर बीमारियों के शिकार हो जाते है। इसी तरह की एक बीमारी है छोटे बच्चे के शिश्न की खाल चिपकने की समस्या, जो कई बार गंभीर संक्रमण का कारण भी बन जाती है। किंग जॉर्ज चिकित्सा

रात में दस बजे से ज्यादा का वक्त हो चला था। लड़के ने इस पर ध्यान भी नहीं दिया था कि ऑटो में कौन बैठा है। ऑटो चले अभी थोड़ी देर ही हुई थी कि उस लड़के के बगल में बैठी लड़की ऑटोवाले से बोली भैया डालीगंज हो कर चलना। ऑटो वाले ने कहा मेरा रूट उधर से नहीं है।

जिस वक्त बच्चे को जन्म होता है, उस समय बन रहे नवग्रह के योग के अनुसार ही संतान की प्राप्ति होती है। यदि सभी ग्रह उच्च के होते हैं तो वह व्यक्ति न केवल ख्याति प्राप्त करता है, बल्कि परिवार का नाम भी रोशन करता है।

5वीं क्लास में पढ़ने वाले बच्चों ने ऐसा प्लान बनाया। जिसे सुनकर सभी हैरान रह गये। पैरेंट्स से शिकायत के डर से 5वीं क्लास में पढ़ने वाले 6 बच्चों ने स्कूल से छुट्टी के बाद घर नहीं जाने का प्लान बनाया।