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महिलाओं में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया जिसे पीरियड्स कहा जाता हैं। जिससे हर एक महिला को गुज़रना पड़ता है। पीरियड्स आम तौर पर हर लड़की को 10 से 15 साल में उम्र में सुरु होती है।

आज भी कई ऐसे कपल्स हैं जो यौन संबंध बनाने से हिचकिचाहट महसूस करते हैं। कुछ सही वक़्त का इंतज़ार करते है तो कुछ को इसकी अच्छी जानकारी ही नहीं होती जिसके कारण दोनों के बीच शर्म और हिचकिचाहट महसूस होती हैं।

मन में बेवजह की चिड़चिड़ाहट, छोटी सी बात पर गुस्सा, कुछ खाने-पीने का मन न करना, अकेले रहने की जगह तलाशना, ज़रा सी बात पर रो देना, दूसरों से देखभाल की उम्मीद करना। बहुत अजीब सा मूड होता है पीरियड्स के दौरान।

यदि प्रति महिला हर माह 8 पैड का प्रयोग करने का अनुमान लगाया जाए तो लगभग हर माह 100 करोड़ से अधिक अपशिष्ट पैड एकत्रित होते हैं।

माहवारी 9 से 13 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हॉर्मोनियल प्रक्रिया है। इसके फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं।

जहां एक तरफ पूरे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की बातें कही जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ आज भी देश में कुछ ऐसी महिला वर्ग हैं, जो समाज के ठेकेदारों द्वारा बनाए गए रिवाजों की वजह से आज भी प्रताड़ित हो रही हैं।

गुजरात में लड़कियों के कपड़े उतरवाए जाने के मामले पर बवाल मचा हुआ है। इस पर कार्रवाई करते हुए 4 लोगों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

हम सब अपने बाहरी अंगों की देखभाल तो हम अच्छी तरह से करते है लेकिन शरीर के अंदरुनी अंगों का ख्याल रखना भूल जाते है। ज्यादातर लोग वजाइना की सफाई करने में शर्माते है या नजरअंदाज करते है।

पीरियड्स होना आम बात है। ये हर लड़की के साथ होता है। लेकिन कुछ लड़कियां इसे लेकर शर्माती हैं किसी से इसके बारे में बात नहीं कारती है। बहुत सी जगह पर ऐसा हैं जहां महिलाए इसको लेकर जागरूक भी नहीं हैं।

जयपुर: पीरियड्स बंद होने या मिस होने पर महिलाओं का ध्यान सीधा प्रेग्नेंसी की तरफ जाता है। प्रेग्नेंसी का पता पीरियड्स मिस होने से ही चलता है। पीरियड्स मिस होने के कुछ हफ्तों बाद ही प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी आपका पॉजिटिव नहीं आ रहा है तो पीरियड्स मिस होने की ये वजहें …