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वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर पेट्रीसिया पेंड्री ने बताया कि उन्होंने रिसर्च में पाया कि इन पालतुओं के साथ महज 10 मिनट रहने से भी हेल्थ में काफी फर्क पड़ सकता है। रिसर्च में जिन स्टूडेंट्स ने कुत्ते और बिल्लियों के साथ समय बिताया उनमें कॉर्टिसोल हार्मोन में कमी पाई गई।यह तनाव पैदा करने वाला एक अहम हार्मोन है।

प्रदेश में इसकी शुरुआत बस्ती से हुई है, जहां 14 प्रखंडों के लिए 14 एंबुलेन्स दी गई हैं। एंबुलेंस में एक लैब असिस्टेंट के साथ दवाएं और अत्याधुनिक उपकरण मौजूद होंगे। एंबुलेंस सेवा की रोजाना मॉनीटरिंग की जाएगी।