poem

लखनऊ: सोशल मीडिया पर एक कविता काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस कविता को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। मगर किसी को भी ये नहीं मालूम कि इसको लिखा किसने हैं। सबसे पहले उस कविता पर नजर डालते हैं, जिसने सोशल मीडिया पर काफी धूम मचा रखी है। यह भी पढ़ें: संन्यास लेने …

नकली था हिटलर सा दिखने वाला स्वभाव, पापा मेरे संग बच्चे थे, मम्मी से भी मेरे पापा अच्छे हैं, पापा आप बहुत सच्चे हैं।।

ये बचपन भी थोड़ा अजीब है कंधों पर किताबों का नहीं जीवन का बोझ है। ना कोई उल्लास है ना कोई रोमांच है, आंखों में नींद नहीं, पेट में अजब सी आग है हाथों में खिलौने हैं ना आंखों में खेलने  की ललक इन्हें तो अपने समान ही बच्चों को खिलाने का काम है। बाल …

रात भर जाग कर ख्वाहिशें लिख रहे हैं… रात भर जाग कर, ख्वाहिशें लिख रहे हैं, जाने किस ख्याल में, क्या और कैसे लिख रहे हैं! जैसे आसमान पर जमीन की दास्ताँ, और जमींन पर आसमान की, सरहदें लिख रहे हैं! नींद की गोद में, सिर रख कर जाग रहीं हैं आँखें, उनपर ख्वाब की …

मुद्दतें हुईं खिडक़ी से बाहर झांके। अब तो लोग ही मुझे बारिश की खबर देते हैं। मैं तो भीतर ही भीतर भीगती रहती हूँ तुम संग, तुम्हारी रंगीन यादों में। बन्द रखती हूं अक्सर खिडक़ी दरवाजेे। तुम्हारी यादों से लबरेज, कब कौन सा लम्हा, इन दीवारों की गिरफ्त से निकल भागे। कितना सम्भाल कर रक्खा …

 हिन्दी के सुविख्यात कवि रामाधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 ई. में सिमरिया, ज़िला मुंगेर (बिहार) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा

     शशि पुरवार नेकी अपनी छोड़ कर, बदल गया इंसान मक्कारी का राज है, डोल गया ईमान डोल  गया ईमान, देखकर रुपया पैसा रहा आत्मा बेच, आदमी है यह कैसा दो पैसे के हेतु, अस्मिता उसने फेंकी चौराहे पर नग्न, आदमी भूला नेकी गंगा जमुना भारती, सर्व गुणों की खान मैला करते नीर को, …

।। दरबे में भेडिय़ा ।। देह के दरबे में दुबककर बैठा है एक भेडिय़ा वह रह-रहकर उचकाता है अपनी गर्दन, उसकी आंखों से निकलने लगती हैं चिंगारियां, चमक उठते हैं उसके पैने दांत, निकलने लगते हैं उसके नुकीले नख, वह हमारी रूह पर छाने लगता है और हमारी सम्पूर्ण सत्ता पर आधिपत्य जमा लेना चाहता …

लखनऊ:  बुराई पर अच्छाई  की जीत का त्योहार होली अपने साथ हजारों खुशियां और उम्मीद लेकर आता है। लोग अपनी जिंदगी में  इसी तरह खुशियों के रंग भरते है।        होली आई, होली आई।        रंग और गुलाल लाई।       खुशियों की सौगात लाई ।                                    रंगों की अनुपम बरसात लाई।                                        दादी- …