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इस बार करवा चौथ बृहस्पतिवार  (17 अक्टूबर) को है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले करवा चौथ में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। हालांकि, आजकल कई पति भी अपनी पत्नी के लिए व्रत रखते हैं। महिलाएं अपना व्रत छलनी से चांद देखकर तोड़ती हैं।

दीपों का त्योहार दीवाली  अंधकार को दूर करता है। और प्रकाश की तरफ ले जाता है। इस दिन सभी ओर दीपों की रोशनी  जगमगाती रहती है। कहते है कि जब रामचंद्र जी लंका पर विजय पाकर और 14 वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या लौटे तो उस दिन पूरे नगर में दीप जलाए गए थे।

नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री को समर्पित है। नवदुर्गा का वह स्वरूप जो सिद्धि और मोक्ष देने वाली है उसे सिद्धिदात्री कहते हैं।नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा

 यदि कोई काम नहीं बन रहा,आप परेशान हो,अच्छाई के बाद भी बुराई मिलती है, व्यापार नहीं चल रहा, काम में मन नहीं लगता तो आप नवरात्र में एक उपाय करें, जिससे आपकी परेशानी का हल मिलेगा। भगवती की इच्छा से आपके सारे काम बन जाएंगे।  

शारदीय नवरात्रि  शुरू हो चुका हैं। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ हुआ है। इस दिन कलश स्थापना के साथ देवी के पूजा शुरु होती नवरात्र में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का महत्व केवल दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं है। ब

अगर नवरात्रि में कुछ भूल चूक हो गई हो तो कोई बात नहीं, अभी नवरात्रि के महत्वपूर्ण उत्तम दिन आने वाले हैं। गुरुवार से पंचमी तिथि शुरू हो रही है। आप अपनी राशि के अनुसार मां के चरण में ये चीजें अर्पित कर सकती है।  नवरात्रि मां के श्रीचरण में नौ दिन अलग-अलग ये चीजें अर्पित करने से मां की असीम कृपा भक्तों को मिलती है।

अभी पितृपक्ष चल रहा है । इसमें श्राद्ध कर्म किए जाते है । लेकिन किसी कारणवश किसी ने अब तक श्राद्ध के नियमों का पालन नहीं किया है तो उसके लिए आश्विन माह में कृष्ण पक्ष एकादशी है इस दिन व्रत कर नियम का पालन करें ते पितरों को मुक्ति मिलती है। इसे इंदिरा एकादशी कहते हैं।

गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की  मूर्ति स्थापित की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। सर्वप्रथम पूज्य  भगवान गणेश सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी की समाप्ति पर उनकी प्रतिमा को पानी में विसर्जित किया जाता है। गणेश विसर्जन की शुरूआत गणेश चतुर्थी के अगले दिन से हो जाती है।

हमारे धर्म ग्रंथों में देवियों के महात्मय का भी वर्णन  है। जिन्होंने अपने  पतियों के लिए हजारों साल तप किया तो उन्हें पति रुप में पाया है। मां पार्वती, माता सती, माता सीता सबने पति की सलामती के लिए कठोर तपस्या कर सतीत्व का वरदान पाया है।  ये तो हुई सतयुग की बातें, आज भी  महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत पूजा पाठ करती हैं।

इस दिन सभी भक्तगण भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होते हुए उनकी पूजा करते हैं और उन्हें कई पकवानों के भोग चढ़ाए जाते हैं। बाजारों में मिलावट के चलते सभी घर पर ही मिठाइयां बनाना पसंद करते हैं। इसलिए  घर पर ही गोंद की बर्फी कैसे बनाई जाए, वह बता रहे हैं।