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लग्न व राशि के अनुसार जानिए किस देवी-देवता की पूजा करें और कौन सा रत्न धारण करें।  पं. सागरजी महाराज के अनुसार पढ़ें राशि के अनुसार किस भगवान की पूजा करनी चाहिए।

कोरोना महामारी के कारण  इस साल किसी भी तीज त्योहार का पता नहीं चल पा रहा है। लोग चाहते हुए भी  धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इस बार 06 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है। वहीं, सावन मास का समापन 03 अगस्त को होगा।  इस महीने को भगवान शिव का महीना कहते हैं।

हमारा धर्म हमें सदगति पर चलने की राह प्रशस्त करता है। हमें परंपराओं से अवगत कराता है।  हिंदू धर्म में कई ऐसी परंपराएं है जिनका पालन सदियों से होता रहा है। उन्हीं परंपराओं का पालन आज भी लोग करते आ रहे हैं अपने से बड़ों के पैर छूते हैं और शादीशुदा महिलाएं आज भी अपने मांग में सिंदूर जरूर लगाती हैं। इन परंपराओं के पीछे धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों महत्व है.....

इस बार 22 मई को वट सावित्री व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए व्रत रखती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत को करने से पति दीर्घायु होता है। इस व्रत में नियम निष्ठा का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि वट सावित्री व्रत पूजा में किन चीजों की जरूरत पड़ती है।

मंत्र' का अर्थ होता है मन को बांधना। ईश्वर की प्राप्ति के मार्ग में मंत्र सबसे कारगर औषधि है। जिस भी ईष्ट की पूजा, प्रार्थना या ध्यान साधना करते हैं उसके नाम का मंत्र जप सकते हैं।

आज चैत्र शुक्ल तृतीया का पावन पर्व हैं जिसे गौरी तीज या गणगौर के रूप में जाना जाता हैं। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन सुहागन महिलाएं अपने सुहाग के प्यार के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं।

देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि 25 मार्च, बुधवार से शुरू हो रहा है। इन 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में 4 नवरात्रि आती है, इनमें से 2 प्रकट और 2 गुप्त होती है। ये चारों ही नवरात्रि ऋतुओं के संधिकाल पर आती हैं। जो लोग सोच रहे है कि कोरोना के चलते देवी मां के दर्शन संभव

बुधवार से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है।ये  नवरात्रि वसंत ऋतु में आता हैं। देवी भागवत ग्रंथ के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसमें में बताया गया है कि हर साल नवरात्रि में देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं।

चैत्र माह की कृष्ण पक्ष को शीतला माता की पूजा की जाती है। इस बार शीतला अष्टमी 16 मार्च यानि आज है। इस पर्व को बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक मां शीतला की आराधना से कई तरह के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं। ऐसी मान्यता है माता शीतला का व्रत रखने से तमाम तरह की बीमारियां दूर हो जाती है।

हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक साल में में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानते है। क्यों कि इस शिवरात्रि को प्रकृति व पर्व का मिलन हुआ था। भगवान शिव योगी जीवन से गृहस्थ जीवन की ओर रुख किया था।