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आज चैत्र शुक्ल तृतीया का पावन पर्व हैं जिसे गौरी तीज या गणगौर के रूप में जाना जाता हैं। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन सुहागन महिलाएं अपने सुहाग के प्यार के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं।

देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि 25 मार्च, बुधवार से शुरू हो रहा है। इन 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में 4 नवरात्रि आती है, इनमें से 2 प्रकट और 2 गुप्त होती है। ये चारों ही नवरात्रि ऋतुओं के संधिकाल पर आती हैं। जो लोग सोच रहे है कि कोरोना के चलते देवी मां के दर्शन संभव

बुधवार से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है।ये  नवरात्रि वसंत ऋतु में आता हैं। देवी भागवत ग्रंथ के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसमें में बताया गया है कि हर साल नवरात्रि में देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं।

चैत्र माह की कृष्ण पक्ष को शीतला माता की पूजा की जाती है। इस बार शीतला अष्टमी 16 मार्च यानि आज है। इस पर्व को बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक मां शीतला की आराधना से कई तरह के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं। ऐसी मान्यता है माता शीतला का व्रत रखने से तमाम तरह की बीमारियां दूर हो जाती है।

हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक साल में में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानते है। क्यों कि इस शिवरात्रि को प्रकृति व पर्व का मिलन हुआ था। भगवान शिव योगी जीवन से गृहस्थ जीवन की ओर रुख किया था।

शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। इसलिए इस दिन उनके विवाह का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा से भगवान शिव का अभिषेक करने से मनवांछित इच्छा पूरी होती है। इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को शाम को 5 बजकर …

हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई काम करते है। जिसमें कुछ कामों को तो कभी भी करते है। कुछ के लिए खास समय का ख्याल रखते है। हिंदू धर्म ग्रंथों में इन्हीं कुछ कामों के लिए पुराने समय से ही कुछ परंपराएं बनाई गई हैं।

सप्ताह में सात दिन होते हैं और सभी दिनों में किसी न किसी देवी-देवता को पूजा जाता है। शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन है। मां लक्ष्मी अपनी अर्चना से जितना प्रसन्न होती है। ऐसे ही शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी का होता है।माता लक्ष्मी की पूजा शुक्रवार के दिन करने से वह अति प्रसन्न होती हैं।

उत्तर भारत में छः ऋतुएं पूरे साल को मौसम के हिसाब से बांटती हैं । हर मौसम का अपना आनंद है। परंतु पुरानी कहावत है- आया बसंत जाड़ा उड़ंत। यह दिन ऋतु परिवर्तन का परिचायक  भी है। भगवान कृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता भी हैं। पक्षियों में कलरव,भौरो की गुंजन,, पुष्पों की मादकता  से युक्त वातावरण बसंत ऋतु की विशेषता है।

माघ मास में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते है। इस बार शुक्रवार के दिन होने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इस बार  24 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शनि स्वयं की राशि मकर में प्रवेश कर रहा है।