primary school

यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामलें में एक के बाद एक अडंगे आ रहे है। कोर्ट-कचहरी में फंसने के बाद अब राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने यूपी के प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा और परीक्षा नियामक प्राधिकार सचिव को नोटिस जारी कर आगामी 07 जुलाई को सुबह 11 बजे तलब किया है।

हमने प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी श्रीमती इंद्रावती देवी से बातचीत कि उन्होंने बताया कि उनके पा रहने के लिए कोई मकान नहीं था किंतु प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें यह बड़ी मदद मिली।

शौचालयों की हालत तो देखने लायक भी नहीं है। साथ ही पीने के पानी के लिए लगा हैंडपम्प भी महीने भर से सूखा पड़ा है यानि कि खराब है। प्राथमिक स्कूल की इस हालत के जिम्मेदार जो भी हैं इसकी कोई सुधि नहीं ले रहे हैं और न ही कोई कदम उठा रहे हैं।

सांप से तो ऐसे सभी डरते हैं, क्योंकि ज्यादातर सांपों का डंक जानलेवा होता है। लेकिन यही सांप जब स्कूलों में निकलने लगे तो आप समझ सकते हैं कि बच्चों की क्या..

प्रदेश सरकार प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लाखों प्रयास कर रही है। प्राथमिक शिक्षा विभाग को बेहतर बनाने के इरादे से विभाग में लगातर प्रयोग चल रहे हैं, लेकिन धरातल पर प्राथमिक विद्यालयों के हालत बदलने के बजाय लगातर बदहाल होते जा रहे हैं।

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री डाॅ. सतीश द्विवेदी ने प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए पुस्तकालयों की स्थापना किए जाने के संकेत दिए हैं। डाॅ. द्विवेदी ने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों को बच्चे पढ़कर शिक्षा ग्रहण करेंगे।

डेड बॉडी या कहे  मृत शरीर  का नाम सुनते ही मन में तरह-तरह की बातें आने लगती हैं। लोग उसके पास जाने से डरते हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि कहीं वह डेड बॉडी उठ कर न बैठ जाए या फिर कहीं उन्हें भी अपने साथ न ले जाए।

बताते चले कि बलिया के एक प्राथमिक स्कूल में सवर्ण बच्चों के अपने घर से बर्तन लाने और दलित छात्रों से अलग बैठ कर मिड डे मील खाने की खबर सामने आयी है।

अहरौरा के हिनौता के सीयूर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में आज बच्चों को मिड-डे-मील भोजन में नमक और रोटी परोस दिया गया जबकि सरकार की तरफ से बच्चों को खाने के लिए चार्ट बनाकर हफ्ते में अलग अलग प्रोटीन युक्त भोजन देने की कवायद है जिसके लिए लाखों का बजट व्यय होता है।