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बारिश की बात करें तो मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो जाएगा। हालांकि, सोमवार से हवा की गति ज्यादा होगी। इसकी वजह से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आने की उम्मीद है।

सभी को ऐसा लग रहा था की बारिश चली गयी और ठंडी का मौसम आ गया है। लेकिन दक्षिण भारत के लोगों को अभी बारिश से आराम नहीं मिला है।

बारिश का मौसम खत्म हो चूका है। इस साल देश के बहुत से राज्य में भीषण बारिश हुई है। जिस वजह से बहुत से घर तबहा भी हुए हैं।

बारिश से सराबोर करने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की बुधवार को देश से विदाई हो गई। वर्ष 1961 के बाद से सबसे ज्यादा देरी से इस बार मानसून लौटा है। दक्षिण पश्चिम मानसून की सामान्य तौर पर एक सितंबर को वापसी की शुरुआत हो जाती है और 30 सितंबर तक यह पूरी तरह से वापस चला जाता है।

NASA को उम्मीद है कि इस बार पराली 200 मीट्रिक टन ज्यादा निकलेगा, जिसकी वजह से प्रदूषण और होगा। नासा का कहना है कि 2 किलोग्राम सल्फर डाईऑक्साइड (SO2), 3 किलोग्राम पर्टिकुलेट मैटर (PM), 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), 1,460 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड (CO2) और 199 किलोग्राम राख परानी जलाने से पैदा होती है।

बताते चलें कि विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सोमवार और शनिवार के बीच गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। नासिक और उत्तर महाराष्ट्र के अन्य जिलों में सोमवार से धूल भरी आंधी के बाद भारी बारिश  सकती है।

देश के कई राज्यों को बाढ़ ने अपनी गिरफ्त में रखा है। बाढ़ की चपेट में आए इन देशों को बहुत नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई लाख लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं। उनके पास रहने का ठिकाना तक नहीं है। इन समस्यों से ग्रस्त लोगों के लिए केंद्र सरकार ने अपने दो राज्यों के लिए अपने लॉकरों के ताले खोल दिया है।

मानसून और बारिश ने पूरे देश में तबाही मचाई है। इस साल मानसून के दौरान बारिश और बाढ़ से करीब 1,900 लोगों की मौत हुई तथा अन्य 46 लोग लापता हैं। शुक्रवार को यह जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने दी।

बारिश और बाढ़ की वजह से हाल इतने बेहाल हैं कि राजधानी पटना में अब प्रशासन को पेयजल, भोजन और दूध के पैकेट बांटने पड़ रहे हैं। निःशुल्क सामुदायिक रसोई का संचालन पटना के दो जगहों पर किया जा रहा है।

खेतों में उड़द और सोयाबीन की फसलों को अति-वर्षा और बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। प्रदेश के पश्चिमी भाग में बारिश और बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।