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भगवान शिव शंकर का प्रिय महिना यानी सावन का महीना शुरु हो चुका है। हर साल सावन  के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग कांवड़ लेकर पदयात्रा करते हैं। कांवड़ यात्रा की पंरपरा की शुरुआत किसने और कब की थी। हर साल सावन के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग भारतभर से कांवड़ में गंगाजल लेकर पदयात्रा

कार्य करने में आत्मविश्वास बना रहेगा। भाइयों एवं घर परिवार का सहयोग बना रहेगा। माता के विचारों का सम्मान करें। माता के भाग्य से आपको सफलता मिलेगी। भाग्य अनुकूल है, नौकरी में पदोन्नति हो सकती है। व्यवसाय वालों को आर्थिक लाभ होगा।

ज्योतिष के अनुसार यदि जन्म, मास, गोचर और दशा, अंतर्दशा, स्थूलदशा आदि में ग्रहपीड़ा होने का योग है। किसी महारोग से पीड़ित होने पर। मुकदमा आदि में फंसने पर, हैजा-प्लेग आदि महामारी से लोग मर रहे हों।,राज्य या संपदा के जाने का अंदेशा हो।, धन-हानि हो रही हो।

इस बार सावन माह में इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस बार सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन कुंभ योग भी बन रहा है। सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को व रक्षाबंधन भी एक ही दिन मनाया जाएगा।

जीवन में हर कार्य किसी न किसी के द्वारा सिखाया जाता है। जिससे हम सिखते है वह हमारे लिए गुरु की तरह होता हैं वह 'गुरु' कहलाता है। साधार‍णतया गुरु का महत्व अध्यात्म में सर्वोपरि माना गया है जिसमें दीक्षा किसी न किसी रूप में दी जाए शिष्य की देखरेख उसके कल्याण की भावना से की जाती है।

चंद्र ग्रहण 16 जुलाई की रात 1:31 बजे से आरंभ होगा। जिसका मोक्ष 17 जुलाई की सुबह 4:31 बजे होगा। यानि इस चंद्र ग्रहण की पूरी अवधि कुल 3 घंटे की होगी। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसके अलावा एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में भी चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण से 9 घंटे पहले  सूतक लगेगा, जिसमें पूजा-पाठ निषेध है। ग्रहण का लोगों पर क्या असर होगा हो जानते हैं...

तिथि -द्वादशी 24:30:20 तक,नक्षत्र : अनुराधा 16:28:01 तक, करण : बव 12:27:52 तक, बालव 24:30:20 तक, पक्ष : शुक्ल पक्ष, योग: शुक्ल 28:02:19 तक, वार : शनिवार, सूर्योदय का समय : 05:31:52 सूर्यास्त का समय : 19:21:30।

इसके पीछे सिर्फ यही कारण है कि आप पूरी तरह से ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें, सिर्फ ईश्वर की पूजा-अर्चना करें। देखा जाए तो बदलते मौसम में जब शरीर में रोगों का मुकाबला करने की क्षमता यानी प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए व्रत करना, उपवास रखना और ईश्वर की आराधना करना बेहद लाभदायक माना जाता है।

चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान करा कर उनकी पूजा करें। जरूरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मणों को अनाज का दान करना चाहिए। 

देवशयनी एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है। दशमी तिथि की रात्रि के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगले दिन प्रात: काल उठकर स्नान कर  व्रत का संकल्प करें भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन कर उनका षोडशोपचार सहित पूजन करना चाहिए।