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तिथि- त्रयोदशी, पक्ष- शुक्ल, माह-कार्तिक, दिन -रविवार, नक्षत्र – रेवती, सूर्योदय – 06:39, सूर्यास्त – 17:30, राहु काल – 16:09 से 17:30तक, चौघड़िया चर – 08:04 से 09:24,लाभ – 09:24 से 10:44,अमृत – 10:44 से 12:05,शुभ – 13:25 से 14:45।

जयपुर माह – कार्तिक,तिथि – द्वादशी ,पक्ष – शुक्ल,वार – शनिवार, नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद,सूर्योदय – 06:38, सूर्यास्त – 17:30,चौघड़िया शुभ – 08:03 से 09:24, चर – 12:05 से 13:25, लाभ – 13:25 से 14:46, अमृत – 14:46 से 16:06।

प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागते ही सारे शुभ काम शुरु हो जाएंगे। इस दिन से भगवान विष्णु निंद्रा से जागते हैं और शुभ कार्य शुरू होते हैं। 8 नवंबर से शादियों का सीजन शुरु हो जाएगा। हर तरफ शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी।लेकिन इधर ग्रहों के राशि परिवर्तन के चलते इस बार विवाह के मुहू्र्त 19 नवंबर से है।

मनुष्य जीवन में सामाजिक और आर्थिक सफलता के लिए प्रयत्न करता है लेकिन जीवन के हर क्षेत्र में आप चाहे  जितना सफल हो जाएं। अगर रिश्तों अविश्वास मिले तो पूरी जिंदगी उसकी भरपाई नहीं कर पाता है। कहने का मतलब कि प्रेम जीवन का अमूल्य पहलू है।

कार्तिक  मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन सिख धर्म के प्रवर्तक गुरुनानक देव की जयंती होती हैं। इस साल गुरुनानक देव की 550वीं जयंती हैं। 12 नवंबर को पूरे देश में हर्षोल्लास से  मनाई जा रही है।

जब किसी लड़के-लड़की शादी होती है तो हर घर में खुशी का माहौल होता है। खासकर लड़कों के घरों में जहां बहू के रुप में शादी के बाद नए सदस्य की एंट्री होती है। वहीं उस दुल्हन के घर में शादी के बाद उदासी छा जाती है। जहां से उसकी विदाई होती है।

अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा  मंगलवार से सुबह शुरू हो गई। इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। आज भी जगह-जगह से आए श्रद्धालुओं ने परिक्रमा लगाई । इसके बाद पंचकोसी परिक्रमा फिर 7 नवंबर को प्रातः 9:47 बजे से 8 नवंबर की दोपहर 11:56 तक चलेगी।

माह – कार्तिक, तिथि – अष्टमी,पक्ष – शुक्ल,वार – सोमवार,नक्षत्र – श्रवण, सूर्योदय – 06:34,सूर्यास्त – 17:34, चौघड़िया अमृत – 06:39 से 08:00,शुभ – 09:22 से 10:43,चर – 13:26 से 14:47, लाभ – 14:47 से 16:09।

कार्तिक  मास में स्नान दान का बहुत महत्व होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी कहते हैं। इस दिन को आंवला नवमी भी कहा जाता हैं। कहते हैं कि  इस दिन स्नान करने से अक्षय फल मिलता है। इस साल हिंदू पंचांग के अनुसार 5 नवंबर को अक्षय नवमी की पूजा है।

हिंदी में इस त्योहार को कई नामों से जाना जाता है, जैसे- छठ, छठी, छठ पर्व, छठ पूजा, डाला छठ, डाला पूजा। छठ का त्योहार सूर्य की आराधना का पर्व है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।