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ॐ मित्राय नमः , ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः व ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः।

संतान की लंबी आयु व समृद्धि के लिए अश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जितिया व्रत रखा जाता है। इस साल यह जिवितपुत्रिका व्रत 22 सितंबर दिन रविवार को रखा जाएगा।  सप्तमी तिथि शनिवार 21 सितबंर को नहाई खाई होगा।

माह – आश्विन,तिथि – पंचमी ,पक्ष – कृष्ण,वार – गुरूवार,नक्षत्र – भरणी , सूर्योदय – 06:07,सूर्यास्त – 18:22,चौघड़िया शुभ – 06:11 से 07:42,चर – 10:44 से 12:15,लाभ – 12:15 से 13:46,अमृत – 13:46 से 15:16,शुभ – 16:47 से 18:18।अभी पितृपक्ष चल रहा है अपने पूर्वजों के नाम पर दान-पुण्य से अपना समय खुद के अनुकूल बनाएं।

श्राद्ध पक्ष में पितरों के तर्पण के लिए यूं तो लोग अनेकों कार्य करते हैं। अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए उनके द्वारा अनेकों प्रकार के उपाय भी किए जाते हैं, लेकिन हम आपको बताते हैं कि यदि आप अपने पितरों को जल्द प्रसन्न करना चाहते हैं तो तुलसी पत्र का प्रयोग अवश्य करें। 

जयपुर : माह – आश्विन, तिथि – चतुर्थी , पक्ष – कृष्ण,वार – बुधवार,नक्षत्र – अश्विनी,सूर्योदय – 06:07, सूर्यास्त – 18:23, चौघड़िया लाभ – 06:11 से 07:42, अमृत – 07:42 से 09:13, शुभ – 10:44 से 12:15, चर – 15:17 से 16:48, लाभ – 16:48 से 18:19

जयपुर:हिन्दू धर्म में विश्वकर्मा को सृजन का देवता माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को ही देव शिल्पी के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा के द्वारा ही की गई थी।पौराणिक युग के सभी अस्त्र-शस्त्र भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाए थे।

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को माताएं जिउतिया व्रत स्वस्थ संतान और उसकी लंबी आयु  के लिए व्रत रखती है ये व्रत हर पुत्रव्रती महिला रखती है। इस बार 21 और 22 सितंबर को जिउतिया का व्रत रखेंगी। इस व्रत में निर्जला व निराहार रहना पड़ता है।

प्राय: कुछ लोग यह शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित की गईं वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है? कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। कोई देवता, कोई पितर, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है।

वेद-पुराणों से लेकर उपनिषदों तक में गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक  के संस्कारों का वर्णनहै। इन्हीं संस्कारों में से एक है पितृ पक्ष। इस बार 13 व 14 सितंबर से पितृपक्ष शुरु हो गया। इस दौरान व्यक्ति अपने पितरों को तर्पण देने के साथ उनका श्राद्ध भी करता है।

लगातार घट रही हरियाली को बढ़ाने के साथ आप पितृदोष से भी निजात पा सकते हैं। पितरपक्ष के समाप्त होने में अभी है  कुछ दिन शेष।पितृदोष में पीपल व गूलर के पौधों को रोपकर सकते हैं। और पितृदोष से मुक्ति पा सकते है। पितृ दोष के कारण, जिनके वंश आगे नहीं बढ़ रहा उन्हें पौधा रोपण करना चाहिए।