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लखनऊ: नवरात्रि में चौथे दिन देवी के रूप कूष्मांडा  की पूजा की जाती है। ब्रह्मांड को जन्म देने के कारण इस देवी को कूष्मांडा कहा जाता है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदि स्वरूपा या …

कानपुर: जंगली देवी मंदिर की मूर्ति के पीछे बनी नाली में ईंट रखने के बाद उस ईंट को निर्माणाधीन मकान में लगाने से दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होती है, ऐसी है जंगली देवी मंदिर की मान्यता। साथ ही जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ माता के चेहरे को निहारता है,धीरे-धीरे माता की प्रतिमा …

गोरखपुर: हिंदू धर्म में देवी-देवता और उनके मंदिरों का बहुत महत्व है। खुशी और गम दोनों में इस धर्म के लोग ईश्वर के प्रति अटूट आस्था रखते है। चाहे कोई भी बात हो हिंदूधर्मावलंबियों के लिए मंदिर जाना जरूरी होता है। मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को  वे अमृत की समान मानते है। जब हम मंदिर …

रांची : सूबे की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिके मंदिर शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। यहां भक्त बिना सिर वाली मां की पूजा करते हैं। मान्यता है कि कामाख्या मंदिर के बाद रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर सबसे बड़ा शक्तिपीठ है। रजरप्पा के भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के …

लखनऊ: नवरात्रि  पर दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। देवी का हर रुप शक्ति का है, जिसका अपना एक अलग महत्व होता है, इसलिए इनका पूजन हम बड़ी ही श्रृद्धा, भक्ति भाव के साथ करते हैं।  यदि मां दुर्गा की पूजा को पूरे विधि-विधान के अनुसार किया जाए तो मां की कृपा उस …

इलाहाबाद: मां शैल पुत्री की अराधाना के साथ आज से चैत्र नवरात्रि की शरुआत हो गई। नव दिन मां दुर्गा के अलग-अलग नव रूपों का भक्त दर्शन कर उनकी पूजा-आराधना करेंगे और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करेंगे। इस बार चैत्र नवरात्रि का एक दिन कम हुआ, तिथियों और नक्षत्रों के अनुसार इस वर्ष …

लखनऊः नवरात्रि के पहले दिन लखनऊ के मंदिरों का नजारा देखने वाला था। पहले दिन भक्तों ने नौ देवियों के पहले स्वरूप शैलपुत्री के दर्शन किए। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर पूरे शहर भर के मंदिरों में दिन भर देवी के दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रही। मां शैलपुत्री के पूजन के दिन …

लखनऊ: चैत्र  नवरात्रि पर मां की पूजा–उपासना बहुत ही विधि–विधान से की जाती है। इसके पीछे का तात्विक अवधारणाओं का परिज्ञान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। आगे…..

 लखनऊ:  समयाभाव एवं कालगत दोषों को दृष्टिगत रखकर नवरात्रि में स्मरण जप के लिए कुछ सरल मंत्र  हैं। विश्वास एवं निष्ठा के साथ इन्हीं मंत्रों से पूजा-प्रार्थना करने से माता भगवती न केवल प्रसन्न होती है, वरन् उसकी दुर्लभ मनोकामना भी पूरी करती है।| आगे…

लखनऊ: कुछ लोग दुर्गा सप्तशती के पाठ के बाद हवन खुद की मर्जी से कर लेते है और हवन सामग्री भी खुद की मर्जी से लेते है। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। ये सब शास्त्रोक्त विधि से उचित नहीं है। हवन के लिए दुर्गा सप्तशती के वैदिकनुसार आहुति की सामग्री इस तरह है। आगे…