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पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस समय कोरोना की दवा बनाने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में भारत भी कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में लगा हुआ है।

दरअसल, वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लैब में इंसानों की कोशिकाओं पर खांसी की इन दवाओं की जांच की गई तो पता चला कि इन दवाओं में मौजूद एक केमिकल शरीर में कोरोना के संक्रमण को और तेजी से बढ़ा सकता है।

चीन में वैज्ञानिक यूनन प्रांत में मौजूद गुफाओं में चमगादड़ों में पाए जाने वाले नए प्रकार के वायरस की खोज में जुटे हैं। खुद को इन वायरसों के हमले से बचाने के लिए ये वैज्ञानिक विशेष सुरक्षा सूट का सहारा ले रहे हैं।

चीन के वुहान से जब कोरोना वायरस महामारी शुरू हुई तो इसे लेकर तरह-तरह की बातें सामने आई। कोरोना वायरस को चमगादड़ों से फैली बीमारी कहा जा रहा है। एक शोध के अनुसार, चमगादड़ों के अलग-अलग समूहों में विशिष्ट प्रकार के वायरस होते हैं।

कोरोना को हराने के लिए वैज्ञानिक लगातार कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के कई देश इससे लड़ने के लिए दवा बनाने का काम तेजी से कर रहे हैं। हालांकि अब...

गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र (जीबीआरसी) के शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के पूरे जीनोम क्रम और तीन नए म्यूटेशन का पता लगाया है। किसी भी कोशिका या वायरस की अनुवांशिक संरचना में बदलाव म्यूटेशन कहलाता है। कोशिका की अनुवांशिक संचना डीएनए से बनती है

कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर पूरी दुनिया के निशाने पर आए चीन ने इस वायरस की उत्पत्ति के ऊपर किए जा रहे अध्ययन व शोध पर तमाम तरीके के प्रतिबंध लाद दिए हैं।

दुनिया भर में कोहराम मचाने वाले कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए तमाम देशों में मरीजों पर तरह-तरह के अध्ययन किए जा रहे हैं। इन अध्ययनों में तमाम ऐसी बातें पता चल रही है जो इस वायरस के बारे में कोई नया राज खोलने वाली होती हैं।

अब तक देश में कोरोना के करीब 128 केस सामने आ चुके हैं। जबकि 3 मौतें भी हो चुकी हैं। ऐसा माना जा रहा था कि अप्रैल और मई महीने में तापमान बढ़ने के साथ ही संक्रमण का फैलना बंद हो जाएगा।

ला ट्रोब युनीवर्सीटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने भारत में रिसर्च एकेडमी का शुभारंभ कर आपसी साझेदारी का नया महत्वपूर्ण दौर...